बाढ़ से विस्‍थापन: यहां दो पाटों के बीच हर साल खो जाता बचपन

बिहार के कोसी इलाके में हर साल तटबंध के बीच रहने वाले बच्‍चे बाढ़ की पीड़ा झेलते हैं। स्‍कूलों में ताला लटक जाता है। बच्‍चे घर में कैद हो जाते हैं।

Ravi RanjanPublish: Sat, 23 Jun 2018 04:21 PM (IST)Updated: Sat, 23 Jun 2018 10:14 PM (IST)
बाढ़ से विस्‍थापन: यहां दो पाटों के बीच हर साल खो जाता बचपन

सहरसा [कुंदन]। देश के कुछ हिस्सों में नदियां भले ही उत्साह व उमंग का विषय हो लेकिन यहां कोसी साल के तीन महीने खौफ लेकर आती है। इस दौरान पूर्व व पश्चिमी तटबंध के बीच लाखों की आबादी त्राहिमाम करती है। सर्वाधिक परेशानी नौनिहालों को होती है।

बाढ़ के दिनों में इस इलाके में बचपन कहीं खो सा जाता है। स्कूलों में जहां ताला लटकता है वहीं बच्चों के खेलने-कूदने तक पर बंदिशें लग जाती है। कोसी की विनाशलीला कम करने के लिए कोसी पूर्वी और पश्चिमी तटबंध के बीच बांध तो दी गयी लेकिन इसकी लीला समाप्त नहीं हो पायी। आज भी इन दोनों तटबंधों के बीच गांव जिंदा हैं। इन गांवों में जिंदगी चलती है।

सरकार ने तटबंध के अंदर रहनेवालों के लिए स्कूल तो खोल दिए लेकिन इन स्कूलों की स्थिति को देखने की जहमत सरकार के मुलाजिमों को नहीं। यही कारण है कि तटबंध के दो पाटों के बीच जिले के दो लाख बच्चों की तकदीर फंसी है।

बाढ़ आते ही थम जाता है शोर

सरकार ने तटबंध के रहने वाली आबादी को शिक्षित करने के लिए स्कूल खोल दिए। स्कूलों के भवन भी बने और शिक्षक भी बहाल हुए। लेकिन दुरुह भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन इलाकों मे संचालित स्कूल की देखरेख नहीं के बराबर होती है। बावजूद सामान्य दिनों में बच्चों की किलकारियां इन स्कूलों में गूंजती रहती है। लेकिन जैसे ही बाढ़ आती है बच्चों की किलकारियां बंद हो जाती है। स्कूलों में वीरानी छा जाती है तो बच्चों का घर से निकलना भी बंद हो जाता है।

बाढ़ के दौरान 212 स्कूलों में लटकता है ताला

शिक्षा विभाग ने स्कूलों में छुट्टी के दो प्रबंध किए हैं। तटबंध से बाहर गर्मियों की छुट्टियां होती है तो तटबंध के अंदर बाढ़ की। हालांकि हाल के वर्षों में इसमें परिवर्तन आया है। अब विभाग तटबंध के अंदर बाढ़ के दौरान भी कई मौकों पर स्कूल बंद नहीं करती। लेकिन वास्तविकता यही है कि पानी आते ही स्कूलों में ताला लटकने लगता है।

बाढ़ के दौरान सलखुआ प्रखंड के 40, महिषी के 91, नवहटटा के 57 और सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के 24 मध्य व प्राथमिक विद्यालय में ताला लटकने लगता है। ऐसे में हर साल यहां के बच्चों का नाता स्कूलों से टूट जाता है। धनुपरा निवासी रमेश यादव बताते हैं कि दियारा में पढ़े-लिखे लोगों की संख्या कम है। इसका कारण है बदहाल शिक्षा व्यवस्था। सामान्य दिनों भी स्कूलों के चलने का कोई समय नहीं होता है। बाढ़ के दिनों में तो स्कूल बंद ही रहते हैं। अलग बात है कि सरकारी फाइलों में ये स्कूल संचालित होते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि, दबंग और अधिकारियों की मिलीभगत से सबकुछ कागजों पर होता है।

फिलहाल बाढ़ की कोई सूचना नहीं है। यदि बाढ़ आती है तो रिपोर्ट मंगवाकर स्कूलों में छुट्टी दी जाएगी।

प्रभाशंकर सिंह, आरडीडीई, कोसी।

Edited By Ravi Ranjan

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