शहादत की स्मृतियां : बच्चों को लेकर वहां गई जहां पति हुए थे शहीद

पटना के आर्मी जवान गणेश प्रसाद यादव ने करगिल युद्ध में श्‍ाहादत दी थी। उनकी कहानी सुनाते पत्नी पुष्पा देवी की आंखें भर आईं।

Amit AlokPublish: Thu, 02 Aug 2018 08:36 PM (IST)Updated: Thu, 02 Aug 2018 11:37 PM (IST)
शहादत की स्मृतियां : बच्चों को लेकर वहां गई जहां पति हुए थे शहीद

पटना [जितेंद्र कुमार]। पटना के बिहटा स्थित पांडेयचक गांव निवासी बिहार रेजिमेंट के जाबांज लांस नायक गणेश प्रसाद यादव की श्‍ाहादत पर पूरे इलाके को गर्व है। उन्‍होंने दुश्‍मनों से लड़ते हुए करगिल के द्रास सेक्टर में शहादत दी थी। उनके पराक्रम को देश ने मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा। आइए सुनते हैं शहीद गणेश की शहादत की कहानी पत्नी पुष्पा देवी की जुबानी...

ऐसे मिली पति की श्‍ाहादत की खबर

28 जून 1999 को सांझ-दीया जलाने का वक्त हो चला था। मैं बिहटा के पांडेयचक स्थित अपने पति के आवास खाना बनाने की तैयारी में थीं। साढ़े सात बजे शाम के रेडियो बुलेटिन में करगिल में युद्ध की बात सुनी। ठीक एक माह पहले वो (पति) छुट्टी बिताकर करगिल के द्रास सेक्टर में अपनी पोस्ट पर गए थे।

पूरी रात चिंता के मारे नींद नहीं आयी। 29 जून को सुबह से ही मन भारी थी। तभी करगिल के द्रास सेक्टर में मेरे पति और बिहार रेजिमेंट के जाबांज लांस नायक गणेश प्रसाद यादव की शहादत की खबर रेडियो और टेलीविजन पर आने लगी। मुझे जब इसकी खबर मिली तो गोद में ढाई साल की बेटी कुमारी प्रेम ज्योति और डेढ़ साल का बेटा अभिषेक कुमार खेल रहा था। लगा जैसे कलेजा फट जाएगा। उस समय बेटा अभिषेक और बेटी ज्योति ठीक से पापा भी नहीं बोल पाते थे। मैंने उनकी निशानी में फोटो, वर्दी और मेडल संजोकर रखा है। मेरे पति को उनके पराक्रम के लिए मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा गया।

दो दुश्मनों को ढेर कर हुए शहीद

करगिल के बटालिक सब सेक्टर में 14 हजार फीट की ऊंचाई पर शत्रु कब्जा जमाए बैठा था। 29 जून की सुबह मेरे पति ने अपने साथी जवानों के साथ दुश्मनों पर हमला बोल दिया। दुश्मन समझ पाते, इससे पहले उन्होंने दो को मार गिराया। इसके बाद दुश्मनों ने भारी गोलीबारी की, जिसमें वे वीर गति को प्राप्त हुए।

सरकार ने अलॉट की गैस एजेंसी

वर्ष 2002 में पति के नाम पर गैस एजेंसी आवंटित की गई। तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री राम नाइक और स्वास्थ्य मंत्री सीपी ठाकुर ने रसोई गैस एजेंसी का उद्घाटन 13 जनवरी 2002 को किया था। इसी एजेंसी के बूते परिवार चल रहा है। जिसे अपना समझकर एजेंसी में रोजगार दिया, वही लाखों की सेंधमारी कर भाग गया। एक-दो लाख नहीं 40 लाख रुपये की चपत लगा गया।

मिले 25 लाख रुपए, कई वादे रहे अधूरे

मेरे पति की शहादत के बाद चौतरफा सहानुभूति जगी। राज्य सरकार ने तब 10 लाख और केंद्र सरकार ने 15 लाख दिए। लेकिन, कई वादे अधूरे रह गए।

एक साल से नहीं मिल रही पेंशन

पेंशन की 75 फीसद राशि मेरे खाते में और 25 प्रतिशत उनके माता-पिता के खाते में जाती है। बीते एक साल से पेंशन खाते से निकासी पर रोक लगी है। मासिक पेंशन करीब 37 हजार रुपये मिलती आ रही थी, लेकिन एक साल की पेंशन करीब 6.50 लाख रुपये इसी माह काट ली। सेना और पेंशन कार्यालय से अधिक भुगतान की बात कही गई, लेकिन हिसाब नहीं दिया गया। यदि वैकल्पिक आय का स्रोत नहीं होता और सिर्फ पेंशन पर आश्रित होती तो परिवार सड़क पर आ जाता।

द्रास सेक्टर जाकर देखा, कितनी कठिन है सीमा की सुरक्षा करना

बचपन से ही दोनों बच्चों को अपने पिता की शहादत की कहानी सुनाती रही। दोनों बच्चों को वर्ष 2000 में करगिल लेकर गई थी। द्रास सेक्टर में जहां लांस नायक शहीद हुये थे, उस जगह को देख आई। टाइगर हिल सहित अन्य क्षेत्रों को करीब से देखकर बच्चों को लगा कि सीमा की हिफाजत करना कितना कठिन है। उनके बूते हम लोग घर में कितने आराम से रहते हैं।

बेटा बीकॉम में और बेटी बनना चाहती फैशन डिजाइनर

बेटा सैनिक स्कूल से पढ़ाई पूरी कर चुका है और पटना में बीकॉम में दाखिला लिया है। बेटी फैशन डिजाइनर बनना चाहती है। निफ्ट पटना में दाखिला के लिए प्रयास कर रही है। बच्चों और परिवार के लिए गैस एजेंसी आय का मुख्य स्रोत है।

''भारत सरकार ने वादे के अनुसार रसोई गैस की एजेंसी और मुआवजा राशि के साथ बच्चों की पढ़ाई के लिए मदद दे दी, लेकिन राज्य सरकार वादा भूल गई। गांव में सामुदायिक भवन अधूरा रह गया। स्कूल बना, लेकिन मास्टर नहीं आए। घर में शहीद बेटे की सिर्फ तस्वीर और वर्दी के सिवा कुछ भी नहीं है।''

- रामदेव (शहीद के पिता)

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शहीद गणेश, एक परिचय यह भी

नाम - शहीद लांस नायक गणेश प्रसाद यादव

जन्म - 30 जनवरी 1970

जन्म स्थान - पांडेयचक, बिहटा।

माता - बचिया देवी

पिता  - रामदेव प्रसाद यादव

विवाह -  1994

पत्नी - पुष्पा देवी

पुत्री  - प्रेम ज्योति

पुत्र - अभिषेक कुमार

सेना में भर्ती - 28 दिसंबर 1987

वीर गति - 29 मई 1999

सम्मान : मरणोपरांत वीर चक्र

Edited By Amit Alok

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