This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
OK

Reality of Women Rights: महिला अधिकारों पर बड़ा खुलासा, 53 फीसद पति की पिटाई को नहीं मानतीं गलत

Reality of Women Rights बिहार में आद्री इंटरनेशनल ग्रोथ सेंटर और जेंडर रिसोर्स सेंटर के शोध में महिला अधिकारों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जानकारी के लिए पढ़ें यह खबर।

Amit AlokFri, 13 Dec 2019 12:59 PM (IST)
Reality of Women Rights: महिला अधिकारों पर बड़ा खुलासा, 53 फीसद पति की पिटाई को नहीं मानतीं गलत

पटना [श्रवण कुमार]। Reality of Women Rights: बिहार में बेटियां पढ़ तो रही हैं, पर अधिकारों के लिए लड़ नहीं पा रहीं। सवाल चाहे आर्थिक आजादी का हो या घर चलाने का। आधी आबादी का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा आज भी चूल्हा-चौका और चारदीवारी को अपनी तकदीर माने बैठा है। चौंकाने वाली बात यह है कि 53 फीसद महिलाओं को कुछ परिस्थितियों में पति की पिटाई में कोई बुराई नहीं दिखती। इतना ही नहीं, राज्य में 43 फीसद लड़कियों की शादियां आज भी 'बाल विवाह' हैं। एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीटयूट (ADRI), इंटरनेशनल ग्रोथ सेंटर (International Growth Centre) और जेंडर रिसोर्स सेंटर (Gender Resource Centre) द्वारा हाल ही में पटना में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों के शोधपत्र (Research Paper) में यह जानकारी दी गई है।

अधिकांश की तकदीर में चूल्हा-चौका और चारदीवारी

सर्वेक्षण और तथ्यों के आधार पर तैयार यह शोधपत्र स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसर पर केंद्रित है। शोधपत्रों के विश्लेषण के बाद चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। राज्य में चलाई जा रही साइकिल, पोशाक, कन्या सुरक्षा जैसी सशक्तीकरण की योजनाओं से बेटियां शिक्षित तो हो रही हैं, पर ब्याह के बाद अधिकांश की तकदीर में चूल्हा-चौका और चारदीवारी ही है।

एक चौथाई की घर चलाने में नहीं चलती अपनी मर्जी

आंकड़े के अनुसार ब्याह के बाद 25 फीसद महिलाएं घर चलाने को लिए जाने वाले निर्णयों में अपनी राय भी नहीं रख पातीं। महज 33 फीसद महिलाएं ही भाग्यवान होती हैं, जिन्हें कुछ पैसे अपनी मनमर्जी से खर्च करने की आजादी होती है।

पांच फीसद को माइक्रो क्रेडिट प्रोग्राम के तहत ऋण

जन धन योजना में महिलाओं के बैंक खाते तो खूब खुले, पर मात्र 26 फीसद ही ऐसी हैं जो खातों का उपयोग मर्जी से कर पाती हैं। राज्य की पांच फीसद महिलाओं को ही माइक्रो क्रेडिट प्रोग्राम के तहत ऋण मिला है।

आज भी 43 फीसद महिलाओं का बाल विवाह

बाल विवाह रोकने के लिए बिहार सरकार ने अभियान चला रखा है। बावजूद इसके जो आंकड़ा विशेषज्ञों ने बताया है, उसके अनुसार राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा संख्या में  बाल विवाह बिहार में हो रहे हैं। राज्य में सौ शादियों में से 43 आज भी बचपन में हो रही हैं। जबकि, राष्ट्रीय औसत 27 फीसद है।

Edited By: Amit Alok

पटना में कोरोना वायरस से जुडी सभी खबरे

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
Jagran Play

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

  • game banner
  • game banner
  • game banner
  • game banner