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बिहारः मंत्री श्रवण कुमार बोले- केंद्र से समय पर धन मिले न मिले, मनरेगा श्रमिकों को मिलती रहेगी मजदूरी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समय पर मजदूरी भुगतान के संकट को समाप्त करने का आदेश दिया है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के मुताबिकः अब अगर केंद्र से इस मद में समय पर राशि नहीं आती है तो राज्य सरकार तत्काल अपने खजाने से खर्च करेगी।

By Akshay PandeyEdited By: Published: Fri, 07 May 2021 12:46 PM (IST)Updated: Fri, 07 May 2021 12:46 PM (IST)
बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार। जागरण आर्काइव।

राज्य ब्यूरो, पटनाः समय पर मजदूरी के भुगतान के बाद मनरेगा में काम की मांग बढ़ रही है। एक महीने के भीतर यह मांग दूनी से भी अधिक हुई है। सरकार को उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में जब कोरोना का खौफ कम होगा, मांग और बढ़ेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समय पर मजदूरी भुगतान के संकट को समाप्त करने का आदेश दिया है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के मुताबिकः अब अगर केंद्र से इस मद में समय पर राशि नहीं आती है तो राज्य सरकार तत्काल अपने खजाने से खर्च करेगी। केंद्र से आने के बाद राज्य सरकार अपना धन वापस ले लेगी।

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आंकड़ों से लगाएं श्रमिकों की बढ़ी मांग का अंदाजा

श्रमिकों की बढ़ी मांग का अंदाजा आंकड़ों से भी जाहिर होता है। अप्रैल के पहले सप्ताह में मनरेगा के तहत प्रतिदिन औसत चार लाख 19 हजार मजदूर काम करते थे। एक से पांच मई के बीच यह औसत प्रतिदिन नौ लाख 84 हजार तक पहुंच गया। पिछले साल कोरोना संकट के दौरान अधिकतम 21 लाख मजदूरों को काम मिला था। श्रवण कुमार ने बताया कि धन की कोई कमी नहीं है। मांग करने वाले शत प्रतिशत लोगों को हम काम की गारंटी देतेे हैं। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्र ने मजदूरी के मद में चार हजार सात सौ 77 करोड़ रुपये दिए थे। वह राशि पूरी तरह मजदूरों के खाते में चली गई। चालू वित्तीय वर्ष में इस मद में केंद्र से अबतक पांच सौ 68 करोड़ रुपये मिला है। इसमें से भी चार सौ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। कुछ राशि बची हुई है। इसके भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

क्यों बढ़ेंगे मजदूर

सरकार अधिक से अधिक मजदूरों को काम देने की योजना इसलिए बना रही है, क्योंकि लाॅकडाउन के चलते मजदूरों की मांग और बढ़ने की उम्मीद है। वजहः ग्रामीण क्षेत्रों के दैनिक मजदूर आम दिनों में काम की तलाश में बड़ी संख्या में निकट के शहरों में आते हैं। लाॅकडाउन के कारण आवागमन के साधन बंद हैं। शहरी गतिविधियां पूरी तरह ठहर गई है। लिहाजा ये मजदूर अपने गांव में ही मजदूरी की तलाश करते हैं। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त योजनाएं हैं। मजदूरी मद में धन भी है। इसलिए किसी मजदूर के सामने काम का संकट नहीं है।


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