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Ram Navami 2021: बिहार के इन मंदिरों से जुड़ी भगवान श्रीराम की स्‍मृतियां, आइए डालते हैं नजर

Ram Navami 2021 LIST of Famous Lord Sri Rama Temples in Bihar बिहार के कुछ मंदिरों के साथ भगवान श्रीराम की स्‍मृतियां जुड़ी हैं। रामनवमी के अवसर पर वहां भक्‍तों की भारी भीड़ उमड़ती रही है। हालांकि इस साल कोरोनावायरस संक्रमण के कारण मंदिर भक्‍तों के लिए बंद रहेंगे।

Amit AlokTue, 20 Apr 2021 04:42 PM (IST)
Ram Navami 2021: बिहार के इन मंदिरों से जुड़ी भगवान श्रीराम की स्‍मृतियां, आइए डालते हैं नजर

पटना, ऑनलाइन डेस्‍क। Ram Navami 2021: LIST of Famous Lord Sri Rama Temples in Bihar कोरोनावायरस संक्रमण (CoronaVirus Infection) की लहर के कारण इस साल रामनवमी (Ramnavami 2021) में कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं होगा। भक्‍तों के लिए मंदिर बंद ही रहेंगे। कई बड़े मंदिरों में पूजा वर्चुअल होगी। बिहार की बात करें तो यह माता सीता की जन्‍मभूमि है। यहां भगवान श्रीराम की स्‍मृतियों से जुड़े कई मंदिर हैं। पटना के महावीर मंदिर में प्राचीन रामसेतु का एक पत्‍थर रखा है तो दरभंगा के अहिल्‍या स्‍थान के पास भगवान ने अहिल्‍या का उद्धार व ताड़का का वध किया था। आइए डालते हैं नजर...

केसरिया में बनाया जा रहा विराट रामायण मंदिर

बात श्रीराम मंदिर की होगी तो पटना के महावीर मंदिर के ड्रीम प्रोजेक्ट केसरिया में बन रहे विराट रामायण मंदिर की चर्चा जरूर होगी। यहां पहले चरण में हनुमान जी, दूसरे चरण में शिव जी और तीसरे चरण में रामजी का मंदिर बन रहा है। पटना के महावीर मंदिर न्‍यास समिति के सचिव किशोर कुणाल ने बताया कि पूर्वी चंपारण के केसरिया में जहां यह मंदिर बन रहा है, उस जगह को जानकी नगर का नाम दिया गया है। विभिन्‍न शैलियों में बन रहे इस मंदिर में महाबलीपुरम समेत देश के कई प्रमुख मंदिरों की झलक देखने को मिलेगी। इस मंदिर को रामायण सर्किट से भी जोड़ा जाएगा। जहां-जहां भगवान श्रीराम के चरण पड़े थे, उन्‍हें तीर्थस्थल के रूप में विकसित कर मंदिर बनाया जाएगा।

पटना के महावीर मंदिर में रखा रामसेतु का पत्‍थर

उत्तर भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर में इस साल भले ही कोरोनावायरस संक्रमण के कारण भक्‍त नहीं आएं, लेकिन रामनवमी के दिन यहां अयोध्या की हनुमानगढ़ी के बाद सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती रही है। इस मंदिर को साल 1730 में स्वामी बालानंद ने स्थापित किया था। साल 1900 तक यह मंदिर रामानंद संप्रदाय के अधीन था। फिर, 1948 तक इसपर गोसाईं संन्यासियों का अधिकार रहा। साल 1948 में पटना हाइकोर्ट ने इसे सार्वजनिक मंदिर घोषित किया। आचार्य किशोर कुणाल के प्रयास से 1983 से 1985 के बीच वर्तमान मंदिर का निर्माण आरंभ हुआ। आज यह एक भव्य मंदिर है।

इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान हनुमान की मूर्तियां हैं। यह मंदिर अन्‍य हनुमान मंदिरो से इस मामले में अलग है कि यहां बजरंग बली की युग्म मूर्तियां एक साथ हैं। एक मूर्ति परित्राणाय साधुनाम् अर्थात अच्छे लोगों के कारज पूर्ण करने वाली है तो दूसरी मूर्ति- विनाशाय च दुष्कृताम्बु, अर्थात बुरे लोगों की बुराई दूर करने वाली है। मंदिर में सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। खास बात यह है कि यहां 15 किलो का रामसेतु का पत्थर कांच के बरतन में रखा है। यह पत्थर पानी में तैरता रहता है।

पटना के जल्‍ला हनुमान मंदिर में सजा राम दरबार

पटना में पटना साहिब रेलवे स्टेशन से करीब एक किमी दूर जल्ला का हनुमान मंदिर है। कभी इस मंदिर के किनारे स्थित एक नहर गंगा और पुनपुन को जोड़ती थी। हालांकि, दोनों नदियां अब यहां से दूर हैं। पहले इस मंदिर के आसपास हमेशा जल-जमाव रहता था, जिस कारण इलाके का नाम जल्‍ला पड़ गया। आज यहां एक भव्य मंदिर है, जिसमें भगवान हनुमान, देवाधिदेव महादेव, विध्न विनाशक गणेश जी और माता भगवती तो हें हीं, श्री राम दरबार भी सजा है।

अनुश्रुतियों के अनुसार साल 1705 में इस सुनसान इलाके में गुलालदास महाराज नाम के एक संत आए और स्थानीय ठाकुरदीन तिवारी के पास जाकर कहा कि उनके बगीचे के नीचे दक्षिण की ओर गंगा बह रही है और उत्तर में विशाल वृक्ष लहरा रहा है। भविष्य पुराण के अनुसार यहां मंदिर की स्थापना होनी चाहिए, इसलिए जमीन में कुछ हिस्सा महावीर मंदिर के लिए निकाल दें। इसके बाद ठाकुरदीन तिवारी ने 10 कठ्ठा जमीन अलग कर दिया। पंडित ठाकुरदीन तिवारी के वंशजों द्वारा पूजा-अर्चना की जाती रही। मंदिर के छठी पीढ़ी के पंडित रामावतार तिवारी ने 22 अगस्त 1999 को मंदिर व इससे जुड़ी संपत्ति को मंदिर के लिए बनी समिति के हवाले कर दिया। फिर, श्रद्धालुओं के सहयोग से जल्ला में करोड़ों की लागत से विशाल हनुमान मंदिर का निर्माण किया गया। रामनवमी पर यहां दो लाख से अधिक श्रद्धालु आते रहे हैं। लेकिन कोरोनावायरस संक्रमण के कारण लगातार दूसरे साल मंदिर का कपाट बंद रहेगा।

इस स्‍थल पर भगवान ने किया था अहिल्‍या का उद्धार

बिहार के दरभंगा जिला स्थित अहियारी गांव है, जो अहिल्‍या स्‍थान के नाम से जाना जाता है। मान्‍यता है कि यहीं भगवान श्रीराम ने ऋषि विश्‍वामित्र की आज्ञा से गौतम ऋषि की पत्‍नी अहिल्‍या का उद्धार किया था। पास में ही स्थित भोजपुर स्‍थान के बारे में माना जाता है कि वहां भगवान राम ने ताड़का का वध किया था। यहां अहिल्‍या देवी का मंदिर बना है। मंदिर परिसर में ही भगवान राम, माता सीता व लक्ष्‍मण के मंदिर बने हुए हैं। रामनवमी के अवसर पर हर साल यहां भारी भीड़ उमड़ती रही है, लेकिन इस साल ऐसा नहीं होने जा रहा है।

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