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काम करने वाली नाबालिग की लगा दी बोली, सात साल जेल में रहेगी आरोपित महिला

घर पर काम करने वाली नाबालिग को जिस्मफरोशी के धंधे में ढकेलना एक महिला को भारी पड़ गया। आरोप में उसे अब सात साल सलाखों के पीछे बिताना होगा। साथ ही 20 जुर्माना भी देना होगा।

Akshay PandeySat, 15 Dec 2018 03:47 PM (IST)
काम करने वाली नाबालिग की लगा दी बोली, सात साल जेल में रहेगी आरोपित महिला

पटना, जेएनएन। घर पर काम करने वाली नाबालिग को बेचना एक महिला को भारी पड़ गया। नाबालिग लड़की का अपहरण करने के मामले में एडीजे मनोज कुमार सिंह ने शुक्रवार को फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र के नयाटोला की 40 वर्षीय असगरी खातून को 7 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपित पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं देने पर आरोपित एक वर्ष अधिक जेल में रहेगी।

कई बार बेचा, देह व्यापार में ढेकेला

आरोपित फुलवारीशरीफ इलाके में ही वर्षों से किरायेदार के रूप में अलग-अलग मोहल्लों में रहती चली आ रही है। अदालत सूत्रों के अनुसार 15 वर्षीय नाबालिग लड़की आरोपित के यहां काम करती थी। आरोपित ने नाबालिग को चालाकी से 20 फरवरी 2008 को पटना में कृष्णा नामक व्यक्ति को बेच दिया। फिर आरोपित और कृष्णा ने उसे सीतामढ़ी में मंजर और सकीना के हाथ बेच दिया। पुत्र मंजर और मां सकीना ने सीतामढ़ी में नाबालिग को देह व्यापार के धंधे में लगा दिया। जब वह ऐसा करने से इनकार करती थी तो उसे काफी मारा-पीटा जाता था। बाद में पीडि़ता को मंजर और सकीना ने किशनगंज के खबड़ा गांव के एक व्यक्ति के हाथ बेच दिया। वहां भी उससे देह व्यापार कराया गया।

पीड़ित के साथ होती थी मारपीट

पीड़ित को इनकार करने पर बेरहमी से मारापीटा जाता था। मामले के अनुसंधानकर्ता ने पीडि़ता को 4 मई 2008 को खबड़ा गांव से बरामद कर लिया। मामले में पीडि़ता ने भी अदालत के समक्ष पूरी घटना को बताया है। वहीं पीडि़त नाबालिग की मां, एक भाई व दो बहनों ने भी अभियोजन की ओर से इस मामले में गवाही दी। बताया जाता है कि इस मामले के अन्य आरोपितों के खिलाफ दूसरे न्यायालय में मुकदमा चल रहा है।

घूसखोर एमवीआई को सजा

घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के मामले में विजिलेंस के विशेष न्यायाधीश ब्रज मोहन सिंह ने शुक्रवार को औरंगाबाद के तत्कालीन मोटर वाहन निरीक्षक रघुवंश कुंवर को दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। आरोपित पर अदालत ने 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। आरोपित घटना के वक्त गया जिले के भी प्रभार में था। वह समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर का निवासी है। प्राथमिकी के अनुसार 23 सितम्बर 2008 को निगरानी की टीम ने आरोपित को 50 हजार रुपये राजेश कुमार से घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा था। निगरानी ने उसके कमरे से घूस का 1.25 लाख रुपये भी बरामद किया था। आरोपित वहां 2006 से पदस्थापित था। वह दलाल रखकर मोटर वाहन चालकों व मालिकों से घूस लिया करता था

Edited By Akshay Pandey

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