खाद्य प्रयोगशाला हुई आधुनिक, नमूनों की जांच व रिपोर्ट में देरी

अगमकुआं स्थित बिहार की इकलौती खाद्य जांच प्रयोगशाला नागरिकों के लिए उपयोगी नहीं साबित हो रही है। इसे करीब 10 करोड़ रुपये से विकसित किया गया है। यहां जांच के लिए अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं लेकिन इसका लाभ प्रदेश की जनता को नहीं मिल पा रहा है।

JagranPublish: Sun, 23 Jan 2022 01:28 AM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 01:28 AM (IST)
खाद्य प्रयोगशाला हुई आधुनिक, नमूनों की जांच व रिपोर्ट में देरी

पटना। अगमकुआं स्थित बिहार की इकलौती खाद्य जांच प्रयोगशाला नागरिकों के लिए उपयोगी नहीं साबित हो रही है। इसे करीब 10 करोड़ रुपये से विकसित किया गया है। यहां जांच के लिए अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं, लेकिन इसका लाभ प्रदेश की जनता को नहीं मिल पा रहा है। लैब में खाने-पीने की चीजों के नमूनों की जांच के लिए आवश्यक राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड यानी एनएबीएल की मान्यता जनवरी 2021 से ही समाप्त है। इस कारण खाद्य सामग्रियों से जुड़े कानूनी पक्ष के नमूनों की जांच बंद है। केवल बाजार में सर्वेक्षण के दौरान जमा होने वाले नमूनों की ही इस लैब में जांच हो रही है। ऐसे करीब छह सौ नमूने प्रतिमाह लैब में पहुंच रहे हैं। इन्हें समय पर जांचने और रिपोर्ट बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारी भी नहीं है। इस कारण जांच रिपोर्ट तैयार होने में एक माह से अधिक समय लग रहा है।

विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अगमकुआं स्थित खाद्य प्रयोगशाला में चार तकनीशियन समेत केवल सात कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि कुल रिक्त पदों की संख्या 42 है। विभाग द्वारा रिक्त पदों पर कर्मचारियों की बहाली के लिए किया गया अब तक प्रयास फाइलों में ही बंद है। सत्र बताते हैं कि लैब की एनएबीएल की मान्यता समाप्त होने के कारण यहां कानूनी नमूनों की जांच एक साल से बंद है। केवल सर्वेक्षण के नमूनों ही पहुंचते हैं। इसकी जांच रिपोर्ट का बहुत अधिक महत्व नहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि केवल कानूनी नमूनों की जांच रिपोर्ट चौदह दिनों के अंदर तैयार करने का प्रावधान है। सर्वेक्षण नमूनों की रिपोर्ट तैयार करने में जल्दबाजी नहीं है।

क्या होता है कानूनी नमूना

विशेषज्ञ की मानें तो जब किसी खाद्य नमूना की जांच रिपोर्ट में मिलावट या अन्य गड़बड़ी सामने आती है तब आरोपित पक्ष को जांच रिपोर्ट को चुनौती देने एक महीना का समय दिया जाता है। निर्धारित फीस जमा कर आरोपित पक्ष जांच को लिए गए एक खाद्य सामग्री के चार नमूनों में से ही एक नमूनों को जांच के नेशनल फूड लैब कोलकाता या गाजीयाबाद भेजता है। वहां की जांच रिपोर्ट ही मान्य होती है। यही लीगल जांच अगमकुआं स्थित लैब में बंद है।

एनएबीएल मान्यता को अगले माह अंतिम मूल्यांकन

खाद्य प्रयोगशाला के प्रभारी डा. सत्येंदु सागर ने बताया कि एनएबीएल की मान्यता फिर से बहाल करने का विभागीय प्रयास जारी है। पूर्व आकलन हो चुका है। सामने आयी पांच-छह कमियों को दूर कर फरवरी में प्रयोगशाला का अंतिम मूल्यांकन कराने के लिए आवेदन दिया जाएगा।

लगभग 10 करोड़ से अत्याधुनिक लैब तैयार

अगमकुआं स्थित खाद्य जांच प्रयोगशाला को उपयोगी बनाने के लिए लगभग दस करोड़ रुपये से आधुनिकीकरण किया गया है। एफएसएसएआइ द्वारा खाद्य प्रयोगशाला में इंडक्टिवली कपल्ड प्लाजमा यानी आइसीपी-एमएस, गैस क्रोमेट्रोग्राफी यानी जीसी-एमएसएमएस और लिक्विड क्रोमेट्रोग्राफी यानी एलसी-एमएसएमएस मशीन लगायी गयी है। इन मशीनों से मीट, मछली, अंडा, तेल, सब्जी, मसाला, कीटनाशक, फंगस, एंटीबायोटिक, फल, पेय पदार्थ, विटामिन, अनाज व खाद्य सामग्रियों में धातु, जहरीले रसायन, कीटाणु आदि के मिश्रण की जांच होगी। इसके कुशल संचालन के लिए कर्मचारियों एवं उपयोगी बनाने के लिए एनएबीएल की मान्यता आवश्यकता होगी।

Edited By Jagran

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