तेजस्वी बदल रहे लालू की छवि, नए दौर के साथ राजद प्रमुख में अाया बदलाव

Sun, 14 Feb 2016 11:18 AM (IST)

पटना [अरविंद शर्मा]। पिता के प्रताप पर राजनीति में प्रवेश कोई नई बात नहीं है, लेकिन बिहार में एक पुत्र अपने पिता की पुरानी छवि को बदलने-निखारने में जुटा है। विरोध-प्रतिरोध की सियासत में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बारे में आम लोगों में कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं।

उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने प्रयासों से लालू को जंगलराज जैसे उन सभी आरोपों से मुक्त करने की कोशिश में हैं, जो दशकों से उनके पीछे पड़े हैं।

विपक्ष के लगातार हमले के बावजूद लालू तीन दशक से बिहार की राजनीति के पर्याय बने हुए हैं। सत्ता से बेदखल रहने के बाद भी लालू कभी हाशिये पर नहीं गए। उनपर विकास एवं सवर्ण विरोधी राजनीति करने के भी आरोप लगाए जाते हैं।

पुत्र को विरासत सौंपने के मुद्दे पर उनकी भरपूर आलोचना हुई। सांसद पप्पू यादव ने बगावत कर दी, लेकिन लालू ने इसकी परवाह किए बिना तेजस्वी को आगे बढ़ाया। अब राज्य सरकार में नंबर दो के दर्जे में आते ही तेजस्वी ने अपने पिता की छवि बदलने के प्रयास तेज कर दिए। क्या-क्या थे आरोप और तेजस्वी उन्हें कैसे बदल रहे हैं, यह देखना मजेदार होगा।

आरोप-1

विकास से वास्ता नहीं

15 वर्षों के लालू राज में विरोधियों ने आम लोगों में धारणा बनाने की कोशिश की थी कि लालू का विकास से कोई वास्ता नहीं, लेकिन तेजस्वी लालू राज को सामाजिक विकास की पहली सीढ़ी मानते हैं एवं संपूर्ण विकास के लिए इसे जरूरी बताते हैं। भाषणों में भी उनका मुख्य फोकस विकास पर ही होता है। उपमुख्यमंत्री बनने के बाद तेजस्वी ने अपने समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया था कि सत्ता भोग लगाने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने के लिए मिली है।

आरोप-2

अपराधियों को संरक्षण

लालू-राबड़ी के शासन में अपराध बढऩे का भी आरोप लगाया जाता है, लेकिन तेजस्वी इसे धोना चाहते हैं। यही कारण है कि अपने एक रिश्तेदार पर रंगदारी मांगने के आरोप लगने के अगले ही दिन तेजस्वी ने कहा कि राजनीति से वह अपराध को खत्म करना चाहते हैं। अपराधी चाहे उनके परिवार का हो या पार्टी का। तेजस्वी ने व्यावहारिक रूप से भी आपराधिक प्रवृति के लोगों से दूरी बना रखी है। पार्टी में ऐसे लोगों को दरकिनार किया जा रहा है, जिनका संबंध अपराध से रहा है।

आरोप-3

सवर्ण विरोधी राजनीति

दबे-कुचले एवं पिछड़े लोगों की आवाज उठाने के कारण लालू को सवर्ण विरोधी बताया जाता है, लेकिन बहुत कम लोगों को ही पता है कि लालू व्यावहारिक रूप में सवर्ण से दूरी नहीं बनाते हैं। पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में ब्राह्मïणों को ही तरजीह दी गई है। मनोज झा राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं तो प्रदेश में चितरंजन गगन और मृत्युंजय तिवारी के हाथ में ही पार्टी की नीति-रीति बताने की जिम्मेवारी है। संगठन चुनाव में तेजस्वी की सलाह पर लालू ने जगदानंद सिंह को निर्वाची पदाधिकारी बनाया।

आरोप-4

तकनीक के विरोधी

तेजस्वी के कारण लालू में सबसे बड़ा बदलाव सोशल मीडिया में सक्रियता के मोर्चे पर आया है। विधानसभा चुनाव के पहले तक लालू इससे दूरी बनाकर रखते थे, लेकिन अब देश-प्रदेश की घटनाओं पर फेसबुक-ट्विटर के जरिए लालू की टिप्पणियां तुरंत हाजिर हो जाती हैं। लालू की देखादेखी राजद के अन्य कई बड़े नेता भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं। कार्यकर्ताओं से दूरी बनाकर रहने वाले लालू अब तेजस्वी की सलाह पर सबके लिए उपलब्ध रहने लगे हैं।

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