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बिहारः एक घर में 5 की मौत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, अब तक दिल्ली नहीं भेजे गए मनोज

कोरोना संकट और दिल्ली के एम्स या किसी अन्य अस्पताल से समन्वय न होने के कारण अब मनोज की हालत गंभीर हो रही है। मधुबनी जिले के चर्चित मोहम्मदपुर कांड में बुरी तरह जख्मी मनोज के इलाज के मामले में पटना के डाक्टरों ने हाथ खड़ा कर दिया है।

Akshay PandeyTue, 20 Apr 2021 05:30 PM (IST)
बिहारः एक घर में 5 की मौत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, अब तक दिल्ली नहीं भेजे गए मनोज

राज्य ब्यूरो, पटना: मधुबनी जिले के चर्चित मोहम्मदपुर कांड में बुरी तरह जख्मी मनोज कुमार सिंह के इलाज के मामले में पटना के डाक्टरों ने हाथ खड़ा कर दिया है। पांच अप्रैल से राजधानी के एक बड़े निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। इस अस्पताल के डाक्टरों ने नौ अप्रैल को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली भेजने की सिफारिश की थी। मनोज आज भी उसी निजी अस्पताल में है। कोरोना संकट और दिल्ली के एम्स या किसी अन्य अस्पताल से समन्वय न होने के कारण अब उनकी हालत गंभीर हो रही है। 

चार मौके पर एक की अस्पताल में मौत

मालूम हो कि होली के दिन मोहम्मदपुर गांव में गोलीबारी हुई थी। चार लोग मौके पर मारे गए। पांचवें की मौत अस्पताल में हुई। छठे मनोज कुमार सिंह हैं। पहले दरभंगा और बाद में पटना के निजी अस्पताल में उन्हें दाखिल कराया गया। नौ अप्रैल को इस अस्पताल के अधीक्षक ने मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा। बताया कि मनोज मेडिकल सपोर्ट पर हैं। न्यूरो के मामले में उनकी हालत स्थिर है। बेहतर इलाज के लिए दिल्ली स्थित एम्स या किसी अन्य बड़े संस्थान में उन्हें भेजने की जरूरत है। गले और छाती में फंसी गोली निकल चुकी है। घाव भी भर रहा है। लेकिन, न्यूरो की समस्या का निदान यहां संभव नहीं है। 

दिल्ली ले जाए बिना पूरा इलाज संभव नहीं

निजी अस्पताल के पत्र पर राज्य सरकार की ओर से मेडिकल बोर्ड गठित हुआ। इसकी बैठक निदेशक प्रमुख डॉ. नवीन चंद्र प्रसाद के कार्यालय कक्ष में 12 अप्रैल को हुई। बोर्ड की बैठक में पहले गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में इलाज की सिफारिश की गई। बाद में इसे संशोधित किया गया। मेदांता के साथ एम्स दिल्ली का भी नाम जोड़ा गया। मनोज के स्वजन सतीश कुमार सिंह बताते हैं कि मेडिकल सपोर्ट थोड़ा कम किया जा रहा है। लेकिन, दिल्ली ले जाए बिना पूरा इलाज संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि पटना के निजी अस्पताल का महंगा खर्च अबतक जन सहयोग से वहन हो रहा है। इन दिनों यह भी धीरे-धीरे कम हो रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि निजी खर्च पर दिल्ली में इलाज हो सके।

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