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तेजस्वी यादव की एक मांग को अरब देशों तक मिल रहा साथ, जानें क्यों गर्म है पटना की लाइब्रेरी का मुद्दा

पटना की खुदाबख्श लाइब्रेरी का मुद्दा आजकल काफी गर्म है। इतना कि अब तो इसमें अरब देशों के मीडिया संगठन भी रुचि लेने लगे हैं। बिहार के कुछ सियासतदान इसे अलग ही रंग देने में लगे हैं। क्‍या है मामला जानिए इस खबर में।

By Shubh Narayan PathakEdited By: Published: Thu, 15 Apr 2021 12:48 PM (IST)Updated: Thu, 15 Apr 2021 01:25 PM (IST)
तेजस्वी यादव की एक मांग को अरब देशों तक मिल रहा साथ, जानें क्यों गर्म है पटना की लाइब्रेरी का मुद्दा
पटना की मशहूर खुदाबख्श लाइब्रेरी। फाइल फोटो

पटना, ऑनलाइन डेस्क बिहार की एक लाइब्रेरी का मसला आजकल अंतरराष्‍ट्रीय होता जा रहा है। यह है पटना के अशोक राजपथ में स्थित खुदाबख्श लाइब्रेरी। करीब 130 साल पुरानी इस लाइब्रेरी को लेकर आजकल सियासत इतनी तेज है कि इसका असर अरब देशों तक देखने को मिल रहा है। अरब मीडिया 'अल जजीरा' ने इसे लेकर ट्वीट किया है। बिहार में यह मुद्दा पहले से ही गर्म है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सहित दूसरे कई नेताओं ने भी इस मसले पर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश की है। 

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दरअसल बिहार के सबसे बड़े पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्‍पताल (PMCH) तक मरीजों की आसान पहुंच के लिए पटना में एक एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जाना है। इसके लिए अशोक राजपथ में कई भवनों और परिसरों का अधिग्रहण करने की तैयारी चल रही है। इसमें न सिर्फ खुदाबख्श लाइब्रेरी, बल्कि पटना कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय और ऐसे कई महत्वपूर्ण परिसरों के हिस्से शामिल हैं। लेकिन सियासत ऐसी है कि केवल खुदाबख्श लाइब्रेरी का मामला ही जोर-शोर से उठाया जा रहा है। ऐसा संदेश देने की कोशिश हो रही है कि बिहार सरकार खुदाबख्श लाइब्रेरी को तोड़ने की कोशिश कर रही है। 

अब विदेशी संगठन भी मामले को देने लगे हवा

मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि अब इसे विदेशी संगठन भी हवा देने लगे हैं। बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग ने पिछले दिनों साफ किया कि एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए खुदा बख्शलाइब्रेरी को तोड़ने की कोई योजना नहीं है। हां यह जरूर है कि लाइब्रेरी के मुख्य भवन से हटकर एक रीडिंग रूम है, जिसे तोड़ने की सहमति लाइब्रेरी प्रबंधन ने खुद दी थी। इसके बदले दूसरी जगह पर रीडिंग रूम बनाने की सहमति बिहार सरकार के दे रखी है। पथ निर्माण विभाग का कहना है कि अगर लाइब्रेरी का प्रबंधन सहमत होता है तो ही लार्ड कर्जन रीडिंग रूम को तोड़ा जाएगा और इसके बदले विभाग अपने खर्चे पर लाइब्रेरी के ही किसी और हिस्से में ऐसे ही रीडिंग रूम का निर्माण कराएगा। 

इंटरनेट मीडिया पर भी माहौल गर्म

हालांकि, इस मामले पर सियासत गर्म है। इसको लेकर इंटरनेट मीडिया पर भी माहौल गर्म है। कई लोग तो ऐसे हैं जो सरकार की तुलना नालंदा विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने वाले बख्तियार खिलजी से कर रहे हैं। 

योजना की जद में पटना कॉलेज व पटना विवि भी

खुदाबख्श लाइब्रेरी को तोड़ने का विरोध कर रहे लोग यह तर्क दे रहे हैं कि 130 साल पुराना यह पुस्तकालय एक धरोहर है। ताज्जुब की बात यह है कि इन लोगों का ध्यान इसी योजना की जद में आ रहे पटना के सबसे पुराने कॉलेज और सबसे पुराने विश्वविद्यालय पर नहीं पड़ रहा है। पटना कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय सहित अन्य कई परिसरों के कुछ हिस्सों का अधिग्रहण भी इस योजना में होना है, लेकिन इसको लेकर कहीं से कोई विरोध नहीं है। पूरा मामले को धार्मिक रंग देने की कोशिश भी हो रही है।

अलग ढंग से परोसा जा रहा मामला

अशोक राजपथ पटना की एक बहुत व्यस्त सड़क है। पीएमसीएच के लिए एलिवेटेड रोड बनाने में कई निजी परिसर का अधिग्रहण करने की जरूरत है। ऐसे निजी परिसरों के मालिक नहीं चाहते कि योजना आगे बढ़े। इसलिए खुदाबख्श लाइब्रेरी का नाम लेकर मामले को अलग ढंग से परोसा जा रहा है, ताकि पूरी योजना स्थगित करनी पड़े। हालांकि बिहार के पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि खुदाबख्श लाइब्रेरी के हिस्से को अधिग्रहण सहमति के आधार पर ही होगा। विभाग ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक उपाय भी किए जाएंगे।

पीएमसीएच के मरीजों के लिए उपयोगी है योजना

पीएमसीएच आने वाले मरीजों के लिए यह योजना वरदान साबित हो सकती है। एलिवेटेड रोड के जरिए मरीजों की एंबुलेंस अशोक राजपथ पर रोजाना लगने वाले जाम से बचकर आसानी से अस्पताल में दाखिल हो सकेगी। यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पीएमसीएच में 5000 बेड के नए अस्पताल का निर्माण होना है। इस बड़े अस्पताल को सीधा संपर्क देने के लिए एलिवेटेड रोड का निर्माण जरूरी माना जा रहा है।


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