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Bihar: कोरोना की जांच में नेगेटिव लेकिन सीटी स्कैन में संदिग्ध मरीज अब पीएमसीएच में होंगे भर्ती

राज्य सरकार की ओर से अलग वार्ड बनाने का दिया गया था निर्देश यहां भर्ती होने वाले सभी मरीजों को कोविड संदिग्ध मान कर किया जाएगा उपचार ऑक्सीजन सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं रहेंगी मौजूद 40 बेड का नया वार्ड बना पीएमसीएच के टाटा वार्ड में दूसरे फ्लोर पर

Shubh Narayan PathakMon, 26 Apr 2021 01:50 PM (IST)
Bihar: कोरोना की जांच में नेगेटिव लेकिन सीटी स्कैन में संदिग्ध मरीज अब पीएमसीएच में होंगे भर्ती

पटना, जागरण संवाददाता। कोरोना संक्रमण को लेकर मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। काफी संख्या में ऐसे मरीज भी आ रहे हैं, जिनका कोरोना जांच एंटीजन व आरटी-पीसीआर जांच में निगेटिव है। हालांकि, लक्षण कोरोना संक्रमण जैसा ही है। साथ ही सीटी स्कैन में भी कोविड संदिग्ध बताया जा रहा है। अब ऐसे मरीजों के उपचार की व्यवस्था पीएमसीएच में की गई है। राज्य सरकार की ओर से ऐसे मरीजों के लिए पीएमसीएच को वार्ड बनाने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद पीएमसीएच के टाटा वार्ड में दूसरे फ्लोर पर 40 बेड का नया वार्ड बनाया गया है। यहां भर्ती होने वाले सभी मरीजों को कोविड संदिग्ध मान कर उपचार किया जाएगा।

ऑक्‍सीजन सहित सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्‍ध

कोरोना जांच में निगेटिव आने के बावजूद संदिग्‍ध मरीजों को पीएमसीएच में इलाज के लिए ऑक्सीजन सहित अन्य आवश्यक सुविधा के साथ-साथ डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टॉफ की भी प्रतिनियुक्ति की गई है। पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. आइएस ठाकुर ने बताया कि प्रधान सचिव की ओर से कोविड संदिग्ध मरीजों के लिए वार्ड बनाने का निर्देश दिया गया था। इसी आलोक में 40 बेड का वार्ड बनाया गया है। यह अब कार्यरत है।

इन मरीजों को किया जाएगा भर्ती

-सर्दी, खांसी, बुखार

-फेफड़ा में किसी प्रकार की परेशानी

-सीटी स्कैन में कोविड संदिग्ध

-आरटी-पीसीआर व एंटीजन जांच में निगेटिव

-सांस लेने में परेशानी

एम्स के डॉक्टर भी कर चुके थे स्पेशल वार्ड बनाने की बात

एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान स्ट्रेन में लगभग चार-सात फीसद ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिनका कोविड एंटीजन व आरटी-पीसीआर निगेटिव है। उन्हें फेफड़े के साथ सांस लेने में परेशानी हो रही है। इनका सीटी स्कैन कराने के बाद कोविड इफेक्ट बताया जाता है। लेकिन, दोनों जांच निगेटिव रहने के कारण उनकी उपचार की सुविधा कहीं नहीं मिल पाती है। इसके लिए एम्स के कई डॉक्टर ऐसे मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड बनाने की बात कह चुके हैं।

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