मुजफ्फरपुर के बेनीपुरी व जानकी वल्लभ की रचनाएं युवाओं को करती रहीं संस्कारित

हिंदी गीत कविता के शिखर पुरुष जानकीवल्लभ शास्त्री की रचनात्मक प्रतिस्पर्धा विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर की रचनधर्मिता से रही। उनका आवास निराला निकेतन साहित्य तीर्थ के रूप में आज भी पूरे देश में जाना जाता है। शास्त्री जी ने कई रचनात्मक पीढिय़ों का निर्माण किया।

Ajit KumarPublish: Thu, 27 Jan 2022 01:18 PM (IST)Updated: Thu, 27 Jan 2022 01:18 PM (IST)
मुजफ्फरपुर के बेनीपुरी व जानकी वल्लभ की रचनाएं युवाओं को करती रहीं संस्कारित

मुजफ्फरपुर, जासं। 'जागो निद्रा तंद्रा के कर बिके हुए बेमोल' जैसी पंक्तियों को स्वतंत्रता आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में लिखने वाले युवा जानकीवल्लभ शास्त्री की रचनाधर्मिता अपनी विकास-यात्रा में राष्ट्रीय चेतना, प्रकृति संवेदना और सत्य दर्शन से संयुक्त होकर निरंतर परवान चढ़ती रही। बेसुरे समय और संक्रमण के दौर में सुरीले जीवन सौंदर्य तथा सामाजिक सद्भाव के लिए जानकीवल्लभ शास्त्री की रचनाओं को पढ़ते हुए हम मानवीय मूल्यों तथा मनुष्यता को विस्तार दे सकते हैं। शास्त्री जी अपने समय से जुड़े हुए एक बड़े रचनाकार के रूप में आज भी अपनी रचनाओं के माध्यम से हमें संस्कारित और प्रेरित कर रहे हैं। आजादी की लड़ाई में अपनी रचनात्मक उपस्थिति अग्निधर्मी रूप में अंकित करने वाले शास्त्री जी ने चीन के आक्रमण पर हिमालय के माध्यम से शौर्य के साथ ललकारा -'ठंडे-ठंडे देख हिमालय, खून हिंद का गर्म है।

हिंदी गीत कविता के शिखर पुरुष जानकीवल्लभ शास्त्री की रचनात्मक प्रतिस्पर्धा विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर की रचनधर्मिता से रही। उनका आवास निराला निकेतन साहित्य तीर्थ के रूप में आज भी पूरे देश में जाना जाता है। शास्त्री जी ने कई रचनात्मक पीढिय़ों का निर्माण किया। शास्त्री जी की पत्रिका बेला के पृष्ठों पर छात्र जीवन में लिखने-छपने वाले डा.संजय पंकज अपनी साहित्य साधना के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं और आज बेला पत्रिका के संपादक के रूप में शास्त्री जी के दिए गए दायित्व का कुशल निर्वहन कर रहे हैं। संजय पंकज विभिन्न विधाओं की कई पुस्तकें चर्चित हुई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित संजय पंकज की मां पर छपी दो पुस्तकें Óमां है शब्दातीतÓ और Óशब्द नहीं मां चेतनाÓ काफी लोकप्रिय हुई है। प्रसिद्ध रामकथा वाचक मोरारी बापू अपने प्रवचनों में उसे उद्धृत करते रहते हैं। 

बेनीपुरी की रचनाएं राष्ट्र निर्माण में प्रेरक

जिले के बेनीपुर गांव के एक भूमिहार ब्राह्मण परिवार में जन्मे रामवृक्ष बेनीपुरी ने साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में ऐसी लकीर खींची कि पूरा देश उनकी प्रतिभा का मुरीद हो गया। उन्होंने आजादी के आंदोलन में साहित्यकार, आंदोलनकारी सर्जक पत्रकार के रूप में पराधीनता की कुहेलिका को भेदने का कार्य किया। उनकी भाषा-वाणी प्रभावशाली थी। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आठ वर्ष जेल में बिताये थे। बेनीपुरी जी ने मैट्रिक की परीक्षा पास करने से पहले ही अपने आप को आजादी की लड़ाई के लिए तैयार कर लिया था। बिहार में हिन्दी साहित्य सम्मेलन को खड़ा करने में आपने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वाधीनता-प्राप्ति के बाद आपने साहित्य-साधना के साथ-साथ देश और समाज के नवनिर्माण कार्य में अपने को जोड़े रखा।  

Edited By Ajit Kumar

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