कर्मचारियों ने किया कुलपति का घेराव, ठप कराया कामकाज

बीआरए विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर बुधवार को कर्मचारियों ने कुलपति का घेराव किया।

JagranPublish: Thu, 20 Jan 2022 01:06 AM (IST)Updated: Thu, 20 Jan 2022 01:06 AM (IST)
कर्मचारियों ने किया कुलपति का घेराव, ठप कराया कामकाज

मुजफ्फरपुर : बीआरए विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर बुधवार को कर्मचारियों ने कुलपति का घेराव किया। कर्मियों ने विश्वविद्यालय के कामकाज को ठप करा दिया। सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दोपहर में कुलानुशासक और कुलसचिव कर्मचारी को आश्वासन देने पहुंचे। क्षेत्रीय मंत्री एवं अध्यक्ष ने दोनों पदाधिकारियों का विरोध कर दिया। पदाधिकारियों ने आश्वस्त किया कि कुलपति से बात कर दो से तीन दिनों में कर्मचारियों की मांगों को पूरा कराया जाएगा। इसके बाद भी कर्मचारी मानने को तैयार नहीं थे। कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगों को 25 जनवरी तक पूरा नहीं किया जाता तो विवि एवं कालेज के सभी शिक्षकेतर कर्मी 27 जनवरी से कामकाज ठप करेगे। शिक्षकेतर कर्मचारी के क्षेत्रीय मंत्री राजीव रंजन ने कहा कि इस आंदोलन के माध्यम से अधिकारियों को चेतावनी दी गई है। कर्मचारी नेता सचिव गौरव एवं अध्यक्ष राम कुमार ने महाविद्यालय के आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया। व्यवसायिक संघ के कर्मचारियों ने भी शिक्षकेतर कर्मचारियों के साथ धरना में भाग लिया। कर्मचारियों ने कहा कि विवि और कालेज स्तर पर संयुक्त मोर्चा बनाकर आंदोलन करेंगे। मौके पर उपेंद्र प्रसाद सिंह, राजीव कुमार, वेदनाथ सिंह, हरेंद्र सिंह, मुकेश कुमार, उमाशंकर सिंह, रामनाथ सिंह, निशांत शेखर, संजय कुमार, उज्जवल कुमार, सुबोध कुमार, नितेश ठाकुर, अमोल कुमार आदि थे। ----------------------

सामूहिक हड़ताल की चेतावनी :

मुजफ्फरपुर : विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ की ओर से कुलपति को हड़ताल की चेतावनी को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है। विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ की ओर से कुलपति को सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि मांगें पूरी नहीं हुई तो 21 जनवरी के बाद कभी भी आंदोलन की घोषणा की जा सकती है। संघ के अध्यक्ष व सचिव की तरफ से दिए गए पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर 25 नवंबर, 15 दिसंबर व 22 दिसंबर को पत्र दिया गया. लेकिन अब तक इस पर कोई पहल नहीं हुई। ऐसे में कर्मचारी अब अपनी आवाज बुलंद करने के लिए हड़ताल करने को मजबूर हैं।

Edited By Jagran

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