महिलाओं और बच्चों के सहारे सीमा पार से आता जाली नोट

भारतीय जाली नोट नेपाल से लाकर देश के विभिन्न हिस्सों में खपाया जा रहा है।

JagranPublish: Sat, 22 Jan 2022 01:41 AM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 01:41 AM (IST)
महिलाओं और बच्चों के सहारे  सीमा पार से आता जाली नोट

मुजफ्फरपुर : भारतीय जाली नोट नेपाल से लाकर देश के विभिन्न हिस्सों में खपाया जा रहा है। मधुबनी में बुधवार को 13 लाख और इससे एक दिन पहले मुजफ्फरपुर में 11.50 लाख के नकली नोट के साथ पाच तस्कर पकड़े गए थे। सभी नोट 500, 200 व 100 के हैं। इन सभी के तार नेपाल और बाग्लादेश से जुड़े हैं। नेपाल से ही नकली नोट लेकर दिल्ली में खपाने पहुंचे रक्सौल के एक युवक को आठ जनवरी को पकड़ा गया था। उसके पास से 2.98 लाख के नकली नोट मिले थे। पूछताछ में उसने दिल्ली, एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित अन्य जगहों पर भारतीय जाली नोट सप्लाई करने की बात स्वीकार की थी। 15 दिन के अंदर नकली नोट पकड़े जाने के तीन मामलों से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।

जाली नोट के धंधे से जुड़े तस्कर भारत और नेपाल की खुली सीमा होने का लाभ उठाते हैं। वे ग्रामीण इलाकों से नोट पहुंचाते हैं। बार्डर से सटे गावों की महिलाओं और बच्चों का सहारा लिया जाता है। सूत्रों की मानें तो नेपाल की राजधानी काठमाडू से सीमावर्ती जिलों में नोट पहुंचाया जाता है। वहीं से भारतीय सीमा में प्रवेश करा दिया जाता है। किसी सीमा पर एक बार पकड़ में आने पर ये अगले जिले में बढ़ जाते हैं।

देहात के बाजार में खपाते अधिकतर जाली नोट : तस्कर अधिकतर जाली नोट देहात में खपाते हैं। गिरोह के सदस्य कस्बे, छोटे शहर, देहाती हाट-बाजार, मंडियों और आढ़तियों को केंद्रित करते हैं। गिरोह के शातिर गड्डियों में भी जाली नोटों को बीच में रखकर खपाते हैं। इन तस्करों का सिंडिकेट सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मधुबनी व चंपारण में सक्रिय है। जाली नोट खपाने के लिए बड़े तस्करों ने मुजफ्फरपुर व इससे सटे जिलों में नेटवर्क बनाया है। इसमें उन्हीं लोगों (रिटेलर) को शामिल किया जाता है, जो जाली नोट खपाने में माहिर होते हैं। उनका काम जिले के विभिन्न हिस्सों में नोट खपत कराना होता है। सूत्रों की मानें तो बड़े तस्कर पहले कुछ जाली नोट देकर ट्रायल करते हैं। इसकेबाद उन्हें बड़ा असाइनमेंट दिया जाता है।

पेपर की गुणवत्ता पर तय होती नोट की कीमत : दिल्ली में गिरफ्तार आदापुर प्रखंड के यमुनापार निवासी रसूल आजम ने पूछताछ में पुलिस को बताया था कि नेपाल में 30 से 35 हजार असली नोट देने पर एक लाख जाली भारतीय नोट मिल जाते हैं। वैसे इसकी कीमत नोटों की गुणवत्ता पर भी तय होती है। बेहतर पेपर वाले नोट के लिए कुल नोट की आधी रकम देनी होती है। यानी एक लाख के लिए 50 हजार देनी पड़ती है। लेन-देन की पूरी प्रक्रिया एडवास होती है। -कोट

जाली नोट के अंतरराष्ट्रीय धंधेबाजों और उन्हें संरक्षण देनेवाले लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। इसमें नेपाल पुलिस की मदद ली जा रही है। बार्डर पर जाच और गश्ती बढ़ाई गई है।

- प्रियव्रत शर्मा, कमाडेंट, सशस्त्र सीमा बल, 43वीं वाहिनी रक्सौल।

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Edited By Jagran

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