'लालटेन' लेकर कुर्सी की दौड़ लगा रहा मुजफ्फरपुर का युवा व्यवसायी

Muzaffarpur Mayor Chunav 2022 कुर्सी पाने की चाह में लगातार समाज सेवा कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि आगामी चुनाव में उन्हें मदद मिलेगी और वे शहर की सबसे बड़ी कुर्सी को पाने में सफल रहेंगे। अभी वे शहर के सबसे धनी इलाके का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

Ajit KumarPublish: Sat, 22 Jan 2022 10:52 AM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 10:52 AM (IST)
'लालटेन' लेकर कुर्सी की दौड़ लगा रहा मुजफ्फरपुर का युवा व्यवसायी

मुजफ्फरपुर, [प्रमोद कुमार]। इन दिनों जिले में कुर्सी की लड़ाई चल रही है। यह शहर की सरकार के मुखिया एवं उपमुखिया बनने को लेकर है। शहर का हर युवा नेता इस लड़ाई को जीतकर कुर्सी पर बैठना चाहता है। इसके लिए अपने-अपने तरीके से तैयारी की जा रही है। शहर के युवा व्यवसायी भी लालटेन लेकर कुर्सी की दौड़ में शामिल हैं। युवा व्यवसायी पांच साल पहले सफाई महकमे के चुनाव में बाजी मार शहर के सबसे धनी इलाके के जनप्रतिनिधि बने थे, लेकिन उनकी नजर तो बड़ी कुर्सी पर टिकी थी। दो साल पहले उन्होंने लालटेन थाम उसकी रोशनी में जिला से लेकर प्रदेश तक अपनी पहचान स्थापित की। अपनी सक्रियता से शहरवासियों में पहचान बढ़ाई। उनको पूरी उम्मीद है कि शहर की जनता उनकी सेवा को ध्यान में रखते हुए शहर की सरकार के मुखिया या उपमुखिया की कुर्सी पर बैठाएगी। 

सूट पहनाकर पखारा पांव

बाबा के मंदिर वाले वार्ड में काम करने वाले सफाई मित्रों की बल्ले-बल्ले है। इलाके के युवा सतरंगी नेता खूब मेहरबान हैं। सतरंगी युवा नेता की शहर में अलग ही पहचान है। वे ग्रह के हिसाब से सातों दिन सात रंग के कपड़े धारण करते हैं। दिल्ली दरबार के परम भक्त हैं। प्रधानमंत्री जो भी करते हैं, वे भी वही करते हैं। सफाई महकमे की कुर्सी पर बैठकर एक दशक से अपने इलाके के लोगों की सेवा करते आ रहे हैं। उनकी सेवा जारी रहे, इसलिए इस साल भी उनको चुनावी मैदान में उतरना है। लोगों में उनकी चर्चा बनी रहे, इसलिए उन्होंने अपने इलाके के सफाई मित्रों के लिए सूट बनवाया है। उनको सूट पहनकर उनका पांव पखारा। सब कुछ महकमे से मिलेे अपने मेहनताने के पैसे से किया। उनके इस कृत से सफाई मित्र तो खुश हैं ही इलाके में भी उनकी खूब चर्चा हो रही है।

कुर्सी पर बैठने को कर रहे समाजसेवा

समाजसेवी युवा हैं। गरीब परिवार से आते हैं। दो साल से काफी सक्रिय हैं। इन दिनों शहर के सबसे बड़े स्लम क्षेत्र में अपना समय दे रहे हैं। उनकी समाज सेवा के रहस्य से अब पर्दा उठा गया है। वह समाज सेवा का सहारा लेकर सफाई महकमे की छोटी कुर्सी तक पहुंचना चाहते थे। इलाके में पोस्टर लगाकर अपनी चाहत को इशारे में व्यक्त कर रहे थे। उनके विरोधियों को इसकी हवा लग गई, इसलिए उनके पोस्टर को नाली में बहा दिया। नाले में पड़े अपने पोस्टर को देख युवा समाज सेवी को गुस्सा आया। नाराजगी में उन्होंनें अपनी मंशा प्रकट कर ही दी। युवा समाज सेवी इलाके में अपनी पहचान को और बड़ा बनाने के कार्य में लगे हुए हैं। अपनी समाजसेवी वाली पहचान को और बढ़ाना चाह रहे हैं, ताकि यह पहचान उनको सफाई महकमे की कुर्सी तक पहुंचा सके।

अब योजनाओं का निरीक्षण कर रहे टोपीबाज नेता

युवा टोपीबाज नेता फिर से लोगों को टोपी पहना रहे हैं। वह न ही सरकारी नौकर हैं और न ही जनता के चुने हुए सेवक। सरकारी योजनाओं का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट दे रहे हैं। इतना ही नहीं, निरीक्षण वाली अपनी रिपोर्ट को इंटरनेट मीडिया पर भी शेयर कर रहे हैं। उनकी यह राम कहानी नई नहीं है। चर्चा में बने रहने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। पहले मानवाधिकार की दुकान चलाते थे, लेकिन नहीं चली। फिर मोबाइल थाम मोबाइल पत्रकार बन गए। इस क्षेत्र में भी उनकी दाल नहीं गली। पिछले साल कोरोना काल में जमकर नेताओं, अधिकारियों एवं नामचीन लोगों के साथ सेल्फी लेेकर इंटरनेट मीडिया पर शेयर किया। साथ ही जमकर कोरोना योद्धा की डिग्री भी बांटी, लेकिन इस बार गड़बड़ हो गया। उनकी चाल लोग समझ गए हैं, इसलिए इस बार कोरोना डिग्री बांटकर अपना चेहरा चमकाने का मौका नहीं मिल पाया।  

Edited By Ajit Kumar

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