विवि में भारी हंगामे के बीच 13 करोड़ घाटे का बजट स्वीकृत

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय स्थित कान्फ्रेंस सभागार में शुक्रवार को सिडिकेट की बैठक हुई।

JagranPublish: Sat, 27 Nov 2021 01:56 AM (IST)Updated: Sat, 27 Nov 2021 01:56 AM (IST)
विवि में भारी हंगामे के बीच 13 करोड़ घाटे का बजट स्वीकृत

मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय स्थित कान्फ्रेंस सभागार में शुक्रवार को सिडिकेट की बैठक हुई। इसमें सिडिकेट सदस्यों ने छात्र हित से जुड़े मामले में बजट में कम राशि का प्रस्ताव देख विरोध किया। हंगामा और सदस्यों के विरोध के बीच 1070.91 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, लेकिन कई मद में राशि बढ़ाने के बाद सदस्यों ने सहमति दी। बताया गया कि यह बजट पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 13.26 करोड़ घाटे का है। पिछले वर्ष 1122.41 करोड़ का बजट प्रस्तुत किया गया था।

सदस्यों ने कहा कि विवि विद्यार्थियों के लिए है। वे हैं तभी हम हैं। जब उनके लिए ही बजट में कुछ नहीं है तो यह किस काम का। दरअसल, स्पो‌र्ट्स मद में विवि ने मात्र 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया था। इसपर सदस्यों ने कहा कि बजट के अभाव में विवि की टीम हाकी समेत अन्य प्रतियोगिताओं में शामिल होने से वंचित हो गई। इससे पहले जो खिलाड़ी खेलने गए उनके बिल का भुगतान नहीं किया गया। ऐसे में सभी सदस्यों ने 21 लाख से बढ़ाकर खेल मद के बजट को 75 लाख करने को कहा। सदस्यों का विरोध देखकर कुलपति ने इसे मान लिया और बजट में शामिल कर इसे आगे रखने को कहा। इसके अलावा छात्रावास की मरम्मत, पीजी विभागों और कालेजों को आकस्मिक मद की राशि समेत अन्य छात्रों से जुड़े मामले में बजट को संशोधित करने को कहा। कुलपति ने इसपर सहमति दी।

बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो.हनुमान प्र.पांडेय ने की। इसमें प्रति कुलपति प्रो.रवींद्र कुमार, कुलसचिव प्रो.आरके ठाकुर, कुलानुशासक डा.अजीत कुमार के साथ ही सदस्यों में डा.शिवानंद, डा.रेवती रमण, डा.धनंजय, डा.हरेंद्र कुमार, डा.सतीश कुमार राय, डा.नरेंद्र कुमार सिंह समेत अन्य सदस्य मौजूद थे।

इन मदों में बजट में मिली स्वीकृति : नए कोर्स की स्वीकृति के लिए 26 करोड़ रुपये, वेतन मद में 213.45 करोड़, पेंशन मद में 450.75 करोड़, वेतन मद में बकाया राशि के लिए 107.48 करोड़ अतिथि शिक्षकों के लिए 24 करोड़, कंप्यूटर और लैब के लिए पांच करोड़, एनएसएस व सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए 59.87 करोड़, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए 2.26 करोड़, फेलोशिप व स्कालरशिप के लिए 3.90 करोड़, रूसा मद में 7.51 करोड़, नए कंस्ट्रक्शन कार्यों के लिए 8.57 करोड़, विभिन्न सामग्री की खरीदारी के लिए 6.5 करोड़, एकेडमिक स्टाफ कालेज के लिए 7.75 करोड़ के साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण के लिए 5.50 करोड़ का बजट पास किया गया।

पीजी विभाग व कालेजों को आकस्मिक योजना की राशि का दिया भरोसा :

पिछले सिडकेट और सीनेट की बैठक में भी पीजी विभागों को 10 हजार रुपये आकस्मिक मद में देने की स्वीकृति मिली थी, लेकिन आठ महीने बाद भी यह राशि विभागों को नहीं मिल सकी। 2022-23 के लिए प्रस्तावित बजट में भी पीजी विभागों के लिए 1.73 करोड़ और 39 अंगीभूत कालेजों के लिए 1.17 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम पर 15.30 करोड़, लाइब्रेरी व स्टडी सेंटर के लिए 5.10 करोड़, नैक के लिए 11.22 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया।

वित्त कमेटी से जुड़े मामलों को नहीं बनी सहमति :

विवि की ओर से वित्त समिति की बैठक से स्वीकृत प्रस्तावों को सिडिकेट सदस्यों ने सहमति नहीं दी। सदस्यों ने कहा कि इसमें पूरी जानकारी नहीं है। कितने का टेंडर है, किन मदों में काम होना है। इसका विवरण नहीं है। ऐसे में सदस्यों ने इसका विरोध किया। सदस्यों ने कहा कि इसका पूरा विवरण अगली बैठक में उपलब्ध कराया जाए। इसे देखने के बाद ही सहमति या असहमति पर विचार होगा।

पैट में सिलेबस से बाहर के प्रश्नों की जांच करेगी कमेटी :

सिडिकेट की बैठक में सदस्यों ने पैट-2020 में कई विषयों में सिलेबस से बाहर से पूछे गए सवाल व कई गलत सवालों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। सदस्यों ने कहा कि यह छात्रों के भविष्य से मजाक हो रहा है। कुलपति ने कहा कि जिस एजेंसी को जांच का जिम्मा दिया गया था। उसके एक सदस्य का देहांत हो जाने से इसमें विलंब हुआ। शीघ्र तीन सदस्यीय विशेषज्ञों की कमेटी संबंधित विषयों में गलत सवालों को लेकर किए गए दावों को देखेगी। इसके बाद यदि प्रश्न गलत हुए तो उसके लिए या तो सभी अभ्यर्थियों को उसके अंक दिए जाएंगे या उस प्रश्न का अंक घटाकर मूल्यांकन किया जाएगा। इस प्रस्ताव को परीक्षा बोर्ड से पास कराना होगा। इनसेट

सिडिकेट में उठा सवाल, यूपी की ही एजेंसी को टेंडर क्यों

सिडिकेट की बैठक में सदस्य डा.हरेन्द्र कुमार ने सवाल उठाया कि डिग्री से लेकर विवि के डिजिटल व गोपनीय कार्यों का जिम्मा यूपी की ही कंपनियों को क्यों दिया जा रहा? कहा कि पदाधिकारियों की ओर से अपने चहेते को लाभ दिलाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। टेंडर की प्रक्रिया को निष्पक्षता के साथ करने की मांग की।

Edited By Jagran

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