कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में साल में सीनेट की दो बैठकों पर समिति ने जताई सहमति

विभिन्न विवि स्नातकोत्तर के विभिन्न विभागों और संबंधित सभी अंगीभूत एवं संबद्ध कालेजों में शिक्षकों- कर्मचारियों की रिक्तियां वित्तीय बजट कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण वित्तीय फंडिंग विभिन्न समितियों और कमेटियों के प्रस्तावों को विश्वविद्यालय स्तर पर सीनेट ही अंतिम मुहर लगाती है।

Ajit KumarPublish: Sat, 22 Jan 2022 10:00 AM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 10:00 AM (IST)
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में साल में सीनेट की दो बैठकों पर समिति ने जताई सहमति

दरभंगा, जासं। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और विकास कार्यों को गति देने के लिए अब साल में दो बार सीनेट की बैठक की जाएगी। सीनेट की बैठक में सदस्यों द्वारा दिए गए सुझाव एवं प्रस्ताव के क्रियान्वयन को लेकर गठित पांच सदस्यीय समिति ने सदस्यों द्वारा दिए गए प्रस्ताव एवं सुझाव पर सहमति जताई है। इस निर्णय पर अंतिम मुहर समिति की ओर से सात जनवरी को सौंपी गई रिपोर्ट के अध्ययन के बाद लग जाएगी। सीनेट सदस्य दुर्गेश राय और कुंवर जी झा द्वारा सीनेट की बैठक में दिए गए प्रस्ताव पर समिति ने अपने प्रतिवेदन में बाद बताया है कि विश्वविद्यालय अधिनियम के मुताबिक साल में दो बार सीनेट की बैठक आयोजित होनी चाहिए। बता दें कि विश्वविद्यालय में हर बड़े प्रस्ताव सीनेट के जरिए ही पास होते हैं। एकतरफा निर्णय नहीं लिया जाता है। छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों सहित वित्त और प्रशासनिक स्तर के बड़े मसलों को सीनेट हल करती है। विभिन्न विवि स्नातकोत्तर के विभिन्न विभागों और संबंधित सभी अंगीभूत एवं संबद्ध कालेजों में शिक्षकों- कर्मचारियों की रिक्तियां, वित्तीय बजट, कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण, वित्तीय फंडिंग, विभिन्न समितियों और कमेटियों के प्रस्तावों को विश्वविद्यालय स्तर पर सीनेट ही अंतिम मुहर लगाती है।

सीनेट की बैठक में संस्थान के विकास संबंधित एजेंडों पर लगती है अंतिम मुहर

आमतौर पर विश्वविद्यालय के सीनेट की आधिकारिक बैठक साल में एक बार होती है। बैठक में सीनेट से पहले जितने भी निर्णय लिए जाते हैं, जैसे एकेडमिक काउंसिल में, सिंडिकेट में, फाइनेंस में सभी को अप्रूवल दिया जाता है। सीनेटर बैठक विश्वविद्यालय के अधीन सभी विभागों, कालेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा करते हैं। सुझाव एवं प्रस्ताव के क्रियान्वयन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन निर्णय लेता है। फिर लिए गए निर्णय को राजभवन भेजकर स्वीकृति मांगी जाती है। राजभवन के फैसले के बाद विश्वविद्यालय में प्रस्तावों को लागू कर दिया जाता है। 

Edited By Ajit Kumar

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