साहित्य लेखन के क्षेत्र में कुछ विशेष करना है जीवन का लक्ष्य

कालेज में पढ़ने के समय से ही साहित्य के प्रति विशेष रुचि रहा। उसी समय से साहित्य लेखन के क्षेत्र में कुछ विशेष करने की भावना मन मस्तिष्क में उत्पन्न होने लगा था।

JagranPublish: Tue, 25 Jan 2022 06:39 PM (IST)Updated: Tue, 25 Jan 2022 06:39 PM (IST)
साहित्य लेखन के क्षेत्र में कुछ विशेष करना है जीवन का लक्ष्य

संवाद सहयोगी, किशनगंज : कालेज में पढ़ने के समय से ही साहित्य के प्रति विशेष रुचि रहा। उसी समय से साहित्य लेखन के क्षेत्र में कुछ विशेष करने की भावना मन मस्तिष्क में उत्पन्न होने लगा था। इसी का परिणाम रहा कि बीएससी की पढ़ाई पूरी कर पुन: बीए की पढ़ाई करते हुए डीएस कालेज कटिहार से हिदी विषय में पीजी की पढ़ाई पूरी की। साहित्य लेखन से 1991 से ही जुड़ गया। यह जानकारी देते हुए डा. सजल प्रसाद ने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद आरके साहा महिला कालेज में व्याख्यता के पद पर कार्य किया। इसके उपरांत 1996 में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर मारवाड़ी कालेज में व्याख्याता सह असिस्टेंट प्रोफेसर बना।

प्रोफेसर बनने के बाद साहित्य लेखन के प्रति रुझान बढ़ता चला गया। अब तक मेरे द्वारा लिखित पांच पुस्तक प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें अज्ञेय और उनके उपन्यास (आलोचना वर्ष 2014), हृदय में उतरे गहरे (मुक्तक-काव्य-संग्रह वर्ष 2017), चाहत की सिदूरी शाम (़ग•ाल-संग्रह वर्ष 2019) और फुनगी पर अटकी पतंग (कविता संग्रह वर्ष 2019) शामिल हैं। जबकि पांचवीं पुस्तक दो धारी तलवार (व्यंग्य संग्रह वर्ष 2022) का विमोचन जनवरी माह में आयोजित होने वाले विश्व पुस्तक मेला दिल्ली में होना था। लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते फिलहाल पुस्तक का विमोचन नही हो पाया। संभवत: दो धारी तलवार (व्यंग्य संग्रह वर्ष 2022) का विमोचन अप्रैल माह में होने की संभावना है। इसके अलावा मेरे द्वारा लिखित दर्जनों शोधालेख व कविता-़ग•ालें नई धारा, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद की परिषद पत्रिका, कोशी शोध सृजन, जर्नल आफ सोशल रियलिटी, अनुचितन विमर्श आदि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है।

Edited By Jagran

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