माना कि इलाके में तिरंगा नहीं लहराता वे भी काला झंडा नहीं फहरा पाते

फोटो- 38 - दिन भर गश्त लगाते रहे सुरक्षा बल फिर भी बोंगी और बरमोरिया के सरकारी स्कूलों में नहीं फह

JagranPublish: Thu, 27 Jan 2022 07:26 PM (IST)Updated: Thu, 27 Jan 2022 07:26 PM (IST)
माना कि इलाके में तिरंगा नहीं लहराता वे भी काला झंडा नहीं फहरा पाते

फोटो- 38

- दिन भर गश्त लगाते रहे सुरक्षा बल फिर भी बोंगी और बरमोरिया के सरकारी स्कूलों में नहीं फहरा तिरंगा

- पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बनी नक्सल प्रभावित इलाकों में झंडोत्तोलन कराना

- सिमराढाब में निजी विद्यालय के संचालक ने दिखाई हिम्मत

- गादी के ग्रामीणों के बीच छलका राष्ट्रप्रेम

अमित कुमार राय, चंद्रमंडी (जमुई) : माना कि इलाके में तिरंगा नहीं लहराता लेकिन अब वे (नक्सली संगठन) भी काला झंडा नहीं फहरा पाते। बदला हुआ परिदृश्य नक्सल प्रभावित बोंगी-बरमोरिया के हैं। यहां नक्सली आतंक का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो गया है ऐसा भी नहीं कह सकते हैं। आखिर तभी तो उन दोनों पंचायतों के किसी भी सरकारी विद्यालय भवन या फिर पंचायत भवनों में राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जा सका। इसे दहशत की बानगी कहें या फिर विद्यालय प्रधान एवं पंचायत प्रधान की उदासीनता, लेकिन हकीकत यही है कि झंडोत्तोलन नहीं होने से वहां के ग्रामीणों में शिक्षकों एवं शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के प्रति गहरी नाराजगी है। इसकी वजह भी है। बोंगी पंचायत के घोर नक्सल प्रभावित सिमराढाब गांव में एक निजी विद्यालय संचालक ने हिम्मत दिखाई तो गादी गांव में ग्रामीणों ने धूमधाम से तिरंगा लहरा कर सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं उसके पदाधिकारियों को आईना भी दिखाया है। साथ ही उन इलाकों में नया सवेरा होने की उम्मीद जगाई है, जहां दिन-रात नक्सली आतंक रहता था। ग्रामीण बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों के दौरान कई छोटे-बड़े नक्सलियों की गिरफ्तारी और पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद संगठन का प्रभाव काफी कम हुआ है। इसके बावजूद राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर इस बार भी विद्यालय प्रधानों के कारण नक्सलियों का आतंक भारी पड़ गया। जागरण प्रतिनिधि ने गणतंत्र दिवस पर दोनों पंचायत अंतर्गत दर्जन से अधिक विद्यालयों का जायजा लिया तो किसी भी विद्यालय में झंडोत्तोलन हुआ नहीं दिखा। सिमराढाब स्कूल में उपस्थित कुछ बच्चों ने बताया कि यहां कई सालों से झंडोत्तोलन नहीं होता है। गादी विद्यालय के समीप घूम रहे एक ग्रामीण ने बताया कि यहां भी वही स्थिति है। बहरहाल दबी जुबान से कई शिक्षकों ने बताया कि वे लोग सुरक्षा कारणों से झंडोत्तोलन नहीं कर पा रहे हैं। इन इलाकों में नक्सलियों द्वारा सरकारी भवनों पर काला झंडा लगाकर विरोध जताया जाता था, लेकिन बीते दो सालों से वे लोग काला झंडा नहीं लगा पाते हैं।

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कोट

सभी विद्यालयों में झंडोत्तोलन करना अनिवार्य है। किन कारणों से झंडोत्तोलन नहीं किया गया, इसकी पड़ताल कराई जाएगी। जांचोपरांत विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

अशोक चौधरी, बीईओ, चकाई

Edited By Jagran

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