नहीं मिली जमीन, ढाई हजार कटाव पीड़ितों के लिए तटबंध बना ठिकाना

जागरण संवाददाता गोपालगंज गंडक नदी के कटाव बर्बाद हुए लोगों की पुनर्वास की आस तमाम प्रशास

JagranPublish: Mon, 24 Jan 2022 11:40 PM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 11:40 PM (IST)
नहीं मिली जमीन, ढाई हजार कटाव पीड़ितों के लिए तटबंध बना ठिकाना

जागरण संवाददाता, गोपालगंज : गंडक नदी के कटाव बर्बाद हुए लोगों की पुनर्वास की आस तमाम प्रशासनिक दावों के बावजूद पूरी नहीं हो सकी है। हालांकि, इस बीच इन्हें कई बार बसने के लिए ठौर उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला तो जरूर, लेकिन नतीजा सिफर रहा। ऐसे में गंडक नदी में आई बाढ़ तथा कटाव से विस्थापित ढाई हजार परिवारों के सदस्य तटबंध के किनारे की झोपड़ियां डाल कर जीवन बसर कर रहे हैं।

जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर की दूरी तय करने पर उत्तर दिशा में स्थित है जादोपुर बाजार। यहां पहुंचते ही कटाव पीड़ितों की दशा स्पष्ट रूप से दिखने लगती है। सारण मुख्य तटबंध के किनारे शरण लेने को विवश इन परिवारों को कई बार सरकारी स्तर पर आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। इनके पुनर्वास के लिए इंतजाम करने की घोषणा भी की गई, लेकिन लंबी अवधि बीतने बाद भी विस्थापितों को बसने के लिए ठिकाना नहीं मिल सका। इस बीच विस्थापित अपनी समस्या को लेकर कई बार सड़क पर भी उतरे, लेकिन सड़क पर उतरने का नतीजा भी कुछ नहीं निकला। हद तो यह कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा भी इन कटाव पीड़तों के काम नहीं आ सकी है।

13 पंचायतों के लोगों ने तटबंध किनारे ली शरण

सारण मुख्य तटबंध से लेकर छरकी व आसपास के इलाकों में जहां-तहां शरण लेने वाले 13 पंचायतों के करीब ढाई हजार परिवारों के लोग कभी खाते पीते परिवार में गिने जाते थे। अस्सी के दशक तक दियारा इलाके की पहचान अच्छी खेती व अन्न की उपज के लिए थी। अस्सी के दशक के बाद गंडक नदी के कहर ने इन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। गंडक की तबाही के शिकार हुए यहां के करीब अस्सी प्रतिशत लोग आज मेहनत मजदूरी कर जैसे-तैसे जीवन यापन करने को विवश हैं।

पांच प्रखंडों के लोग प्रभावित

कटाव की त्रासदी के कारण जिले के चौदह प्रखंडों में से छह प्रखंड कुचायकोट, गोपालगंज, मांझा, बरौली, सिधवलिया तथा बैकुंठपुर प्रखंड प्रभावित हैं। इनमें से गोपालगंज, मांझा, बैकुंठपुर, बरौली तथा कुचायकोट प्रखंडों के कई गांव बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।

समाप्त हो चुका है 18 गांवों का अस्तित्व

कटाव के कारण अबतक के आंकड़ों के अनुसार छोटे बड़े 18 गांवों का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। इनमें रजवाहीं, टोंक बैरियां, सहडीगरी, खाप मकसूदपुर, सेमरियां, मुसहर टोली, निरंजना, भोजुली, नया टोला जैसे गांव शामिल हैं। इसके अलावा कई ऐसे गांव हैं, जहां प्रत्येक वर्ष गंडक नदी के कटाव से दर्जनों परिवार बेघर हो रहे हैं। इसके बावजूद इनकी सुध लेने वाला कोई भी नहीं है।

Edited By Jagran

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