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गया जंक्‍शन पर प्रवासी मजदूरों को नहीं होगी दिक्‍कत, खाने से लेकर उपचार तक की हुई व्‍यवस्‍था

गया जंक्शन पर यूनिसेफ रेलवे चाइल्‍ड लाइन एवं आरपीएफ की ओर से प्रवासी मजदूरों व उनके परिवार के लिए दवा उपचार घर तक पहुंचाने के लिए वाहन आदि की व्‍यवस्‍था की गई है। भोजन का इंतजाम भी किया गया है।

Vyas ChandraFri, 07 May 2021 05:08 PM (IST)
गया जंक्‍शन पर प्रवासी मजदूरों को नहीं होगी दिक्‍कत, खाने से लेकर उपचार तक की हुई व्‍यवस्‍था

गया, जागरण संवाददाता। कोरोना काल में लॉकडाउन (Corona Lockdown in Bihar) को लेकर यूनिसेफ (UNICEF), रेलवे चाइल्ड लाइन तथा आरपीएफ के सहयोग से गया जंक्शन पर शुक्रवार को एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। महानगरों से ट्रेनों के माध्‍यम से लौट रहे प्रवासी मजदूरों व उनके परिवार की सहायता व उन्‍हें घर तक पहुंचाने के लिए वाहन की व्‍यवस्‍था की गई है। ऐसी व्‍यवस्‍था पूर्व मध्य रेलवे (East Central Railway) के कुछ चुनिंदा स्टेशनों पर की गई है।  इसके तहत जो भी प्रवासी मजदूर या उनके बच्चे दिल्ली मुंबई, बंगलुरु या अन्य बड़े प्रदेशाें और महानगरों से लौट रहे हैं। उनकी गिनती करना और अगर उनको कोई परेशानी है तो उनका समाधान करना है।  आरपीएफ इंस्पेक्टर एएस सिद्दीकी ने बताया कि बीमार प्रवासी मजदूरों और उनके बच्चों का इलाज कराने की भी योजना है। इस स्कीम के तहत गया जंक्शन पर स्वयंसेवी संस्था चाइल्ड लाइन के 15 स्वयंसेवी एवं रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी एवं जवान तैनात किए गए हैं।

प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए रहेगा वाहन 

गया जंक्शन पर यूनिसेफ एवं चाइल्ड लाइन की ओर से घर पहुंचाने के वाहन की व्यवस्था की गई है। यह गया जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया में खड़ा है। साथ ही बच्चों की विशेष देखभाल करना अगर उनमें कोई बीमार है, तो उसकी इलाज की व्यवस्था करना, कोई अपने घर पहुंचने में सक्षम नहीं है तो उनको घर भेजने की भी व्यवस्था भी की गई है। 

खाने-पीने की भी की गई है व्‍यवस्‍था 

प्रवासी मजदूर या उनके बच्चे के लिए खाने-पीने की व्‍यवस्‍था भी की गई है।  बच्चों के लिए ड्राई फूड जिसमें बिस्किट, ब्रेड, मक्खन आदि के पैकेट दिए जा रहे हैं।मालूम हो कि परदेस में नौकरी कर रहे लोगों के लिए कोरोना महामारी रोजी-रोटी की समस्‍या लेकर आया है। नौकरी जाने के बाद ऐसे लोग लौट रहे हैं। लेकिन बिहार में लॉकडाउन की वजह से खासकर परिवहन की काफी समस्‍या हो रही है। तय समय के बाद खाने-पीने के सामान नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में यह व्‍यवस्‍था काफी राहत भरी होगी।  

Edited By: Vyas Chandra

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