औरंगाबाद: जुनून की वान से नीतू ने ध्वस्त की परिवार की गरीबी, पति के दिव्यांग होने के बावजूद नहीं मानी हार

नीतू अपनी जीवन में संघर्ष करते आई है। नीतू एक तरफ जीवन में संघर्ष कर रही थी तो दूसरी ओर गरीबी इसके परिवार का जीवन नहीं पनपने दे रहा था। इसी बीच नीतू के पति का दुर्घटना हो गया। दुर्घटना में पति दिव्यांग हो गए।

Prashant Kumar PandeyPublish: Sun, 23 Jan 2022 04:36 PM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 04:36 PM (IST)
औरंगाबाद: जुनून की वान से नीतू ने ध्वस्त की परिवार की गरीबी, पति के दिव्यांग होने के बावजूद नहीं मानी हार

 जागरण संवाददाता, औरंगाबाद : गरीबी को दूर भगाने व परिवार को उन्नति की राह पर लाने के लिए वर्तमान परिवेश में पुरुषों के साथ महिलाएं भी कदमताल मिलाकर काम रही हैं।रोजगार का क्षेत्र हो या खेल का मैदान हो, मुकाम हासिल करने के लिए दोनों प्रयासरत हैं। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं जीविका के माध्यम से और अधिक सशक्त बन रही है। इसका उदाहरण रफीगंज प्रखंड के चिरैला गांव निवासी नंदकिशोर विश्वकर्मा की पत्नी नीतू देवी है। नीतू के परिवार की स्थिति खराब थी। इसके पति किसी तरह मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। नीतू के एक पुत्र और दो पुत्री है। समस्याओं के बीच जीवन यापन करना पड़ता था। 

संघर्ष के बावजूद नहीं मानी हार

नीतू अपनी जीवन में संघर्ष करते आई है। नीतू एक तरफ जीवन में संघर्ष कर रही थी तो दूसरी ओर गरीबी इसके परिवार का जीवन नहीं पनपने दे रहा था। इसी बीच नीतू के पति का दुर्घटना हो गया। दुर्घटना में पति दिव्यांग हो गए। संघर्ष के बीच नीतू स्वयं सहायता समूह से जुड़ी। समूह से दो बार में तीस हजार रुपये लोन लेकर पति का इलाज कराया। इस बीच वह कर्ज में डूब गई। विकलांग होने के कारण उसके पति मजदूरी भी नहीं कर पा रहे थे।

सब्जी व किराना दुकान ने बदली तकदीर

संघर्ष के बीच नीतू का चयन सतत जीविकोपार्जन योजना के सदस्य के रूप में 21 अक्टूबर 2019 को ग्राम संगठन के द्वारा किया गया। संगठन के द्वारा नीतू से 4,927 रुपये से सब्जी का व्यवसाय शुरू कराया गया। धीरे-धीरे पूंजी बढ़ा तो संगठन के द्वारा शेष 15,073 रुपये मुहैया कराया गया। इस पैसा से नीतू ने सब्जी से साथ किराना दुकान की शुरूआत की। सब्जी व किराना दुकान से नीतू का तकदीर बदल दिया। दुकान से आमदनी बढ़ते गया। नीतू से सभी कर्ज को पूरा कर दिया। वर्तमान में नीतू के बैंक में 25 हजार रुपये जमा है। प्रतिमाह पांच से छह हजार रुपये कमा रही है।

बच्चों को दे रही बेहतर शिक्षा

जुनून की वान से नीतू ने गरीबी को ध्वस्त किया। परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारा। नीतू अब बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रही है। विद्यालय में नामांकन कराया है। नीतू का मानना है कि लड़कियों को जागरूक होने से परिवार की दशा बदल जाती है। स्वरोजगार कर गरीबी को दूर किया जा सकता है। नीतू ने अपने जीवन में संघर्ष किया है। संघर्ष का परिणाम है कि वह गरीबी को दूर कर रही है। नीतू के कार्य को देख अन्य महिलाएं जागरूक हो रही हैं।

पवन कुमार, डीपीएम, जीविका समूह।

Edited By Prashant Kumar Pandey

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