मत्स्य व बटेर पालन के लिए चर्चा में है रामपुर गुलरिया गांव

मोतिहारी। मानव जीवन के आदर्श व सिद्धांतों को समझने के लिए व्यक्ति के जीवन में शिक्षा आवश्यक है। इसी दौरान बहुत लोगों को सरकारी या निजी कंपनी में सेवा का मौका मिल जाता है।

JagranPublish: Mon, 24 Jan 2022 11:22 PM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 11:22 PM (IST)
मत्स्य व बटेर पालन के लिए चर्चा में है रामपुर गुलरिया गांव

मोतिहारी। मानव जीवन के आदर्श व सिद्धांतों को समझने के लिए व्यक्ति के जीवन में शिक्षा आवश्यक है। इसी दौरान बहुत लोगों को सरकारी या निजी कंपनी में सेवा का मौका मिल जाता है। जिनके बदौलत वे समाज में एक अच्छा स्थान प्राप्त कर लेते है। वहीं कुछ लोगों को उच्चतर शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी रोजगार प्राप्त नहीं होता है। ऐसे में लोगों को निराश नहीं होना चाहिए। शिक्षा प्राप्त करने का मतलब सरकारी नौकरी प्राप्त करना नहीं है। यह तो व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक है। आज बहुत सारे ऐसे लोग है जो उच्चतर शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी स्वरोजगार के क्षेत्र में बेहतर कर रहे है। पुनदेव पटेल भी ऐसे लोगों में से एक है । जो अपने क्षेत्र में पुरुषों के लिए प्ररेणास्त्रोत बन रहे हैं। इतना ही नहीं पूर्वी चंपारण जिले के पिपराकोठी स्थित कृषि विज्ञान अनुसधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अरविद कुमार सिंह भी छौड़ादानो प्रखंड क्षेत्र के रामपुर गुलरिया गांव पहुंच चुके है। नक्सलवाद की गाथा पर कालिख पोतने का काम कर रहे शिक्षित बेरोजगार

अस्सी से नब्बे के दशक में नक्सलवाद की धरती कहा जाने वाला छौड़ादानों प्रखंड इन दिनों मत्स्य पालन और बटेर पालन के लिए चर्चा में है। रामपुर गुलरिया गांव के पुनदेव पटेल ने 1985 में राजनीति विज्ञान विषय में एमए की पढ़ाई पुरी करने के बाद बेरोजगार रहे। लेकिन वे हार नहीं माने, दिनभर कुछ अच्छा करने के लिए प्रयासरत रहते थे। पुस्तैनी पेशा मत्स्य पालन एवं हेचरी के क्षेत्र में ही अपना कैरियर तलाशना शुरु किए। तब से वे आज तक पीछे मुड़ कर नहीं देखें। इस क्षेत्र में नित्य नई सफलताओं की इबादत लिखने में मशगूल है। इसी का नतीजा है की 12 एकड़ में फैले भूखंड में इन्होंने मत्स्य पालन एवं हेचरी के लिए एचपी हेचरी की शुरुआत की 2021 में इन्होंने इसी परिसर में बड़े पैमाने पर बटेर पालन का कारोबार शुरू किए। इस जगह पर पटेल ब‌र्ड्स फार्मिंग के नाम से इसका पंजीयन कराया है। इसकी क्षमता 45 हजार की है यानी एक बार में 45 हजार बटेर तैयार किए जा रहे हैं। पिपराकोठी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ. अरविद कुमार सिंह की अध्यक्षता में वैज्ञानिकों की टीम एचपी पटेल मत्स्य हेचरी एवं पटेल बटेर पालन हैचरी का निरीक्षण किया। वरीय वैज्ञानिक ने पुनदेव पटेल द्वारा किए जा रहे बटेर पालन के कार्यों की सराहना की तथा कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा उन्हें हर संभव सहयोग दिलाने का भरोसा दिलाया । वहीं निरीक्षण टीम में शामिल पशुपालन वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार ने बटेर पालन एवं हेचरी से संबंधित तकनीकी एवं व्यवहारिक जानकारी उपलब्ध कराएगी। बताते चले की मांसाहारियों में इन दिनों बटेर की मांग काफी बढ़ रही है। क्योंकि इसमें कैलेस्ट्रोल की मात्रा काफी कम रहती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि बटेर कम दाना खाकर भी 40 से 50 दिन के अंदर बेचने लायक तैयार हो जाता है। यह भी बताया गया की यहां से बटेर के साथ-साथ उसके चुजे की भी बिक्री की जाती है। एक तरह से यह बटेर पालन केंद्र आकर्षण का मुख्य केंद्र बना है।

Edited By Jagran

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