दारूल कजा से कम होंगे मुकदमों के बोझ

मोतिहारी । अब मोतिहारी शहर सहित आसपास प्रखंडों में रहनेवाले मुस्लिम समुदाय के लोग आपसी विवादों को निपटारा दारूल कजा (शरई अदालत) के कार्यालय में निपटा सकेंगे।

JagranPublish: Sat, 04 Dec 2021 11:02 PM (IST)Updated: Sat, 04 Dec 2021 11:02 PM (IST)
दारूल कजा से कम होंगे मुकदमों के बोझ

मोतिहारी । अब मोतिहारी शहर सहित आसपास प्रखंडों में रहनेवाले मुस्लिम समुदाय के लोग आपसी विवादों को निपटारा दारूल कजा (शरई अदालत) के कार्यालय में निपटा सकेंगे। नगर भवन के मैदान में शनिवार को अमीर-ए-शरियत बिहार, झारखंड, उड़ीसा व मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड दिल्ली के सदस्य हजरत मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी ने इसकी घोषणा की। इस मौके पर काजी-ए-शरियत के रूप में मुफ्ती रेयाज अहमद कासमी को तंजीम इमारत-ए-शरिया के अध्यक्ष मनोनीत किया गया। उन्हें पूरी जिम्मेदारी के साथ दारूल कजा में आनेवाले मामलों के निष्पादन करने को कहा गया, ताकि समाज के लोगों का भरोसा कायम रहे। बताया गया कि इस वर्ष बिहार के दस जगहों पर दारूल कजा की स्थापना की जाएगी, जिसकी शुरूआत मोतिहारी से की गई है। रविवार को अररिया जिला में दारूल कजा की स्थापना की जाएगी। अमीर-ए-शरियत श्री रहमानी ने कहा कि दारूल कजा की स्थापना से अदालतों पर मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। वहीं, मुस्लिम समुदाय के लोग आपसी झगड़े सुलह-समझौते से निपटा सकेंगे। बिहार, उड़ीसा, झारखंड में 70 दारूल कजा कमेटियां पूर्व से संचालित है। मोतिहारी में इसका कार्यालय शहर के नकछेद टोला सलामनगर स्थित मदरसा खादिजतुल कुबरा लिल्वनात परिसर में होगा। इसके संचालन के लिए मुफ्ती रेयाज अहमद कासमी को काजी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि सभी धर्म समुदाय के लोग आपस के झगडे़, अपने तरीके से हल करें और मुल्क को खुशहाल रखने का लक्ष्य बनाएं। कहा कि दारूल कजा में 70 प्रतिशत मामलों का निष्पादन एक माह के अंदर व 95 प्रतिशत मामलों का निष्पादन दो माह के अंदर कर लिया जाता है। ऐसे में लोगों का समय भी बचता है और लोग मानसिक व आर्थिक नुकसान से बच जाते है। कार्यक्रम के दौरान शमशाद रहमानी कासमी ने निकाह, तलाक समेत कई बिदुओं पर रोशनी डालते हुए दारूल कजा के महत्व को बताया। कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में अब्दुल रशीद बर्क, आजाद आलम कासमी, मौलाना सोहैल अहमद नदवी, मुफ्ती सोहराब नदवी, काजी अतहर जावेद कासमी, मौलाना अली अख्तर, काजी बदरे आलम, मुफ्ती रेयाज अहमद कासमी, खुर्शीद आलम, प्रो. मो. एकबाल हुसैन, अब्दुर्रशीद बर्क, मौलाना अब्दुस्सलाम कासमी आदि शामिल है। समारोह को सफल बनाने में मुफ्ती साजिद इकबाल कासमी, कारी मो. अरशद कासमी, रफी अहमद, फखरूद्दीन अबी अहमद, मो. सरशद उर्फ रेहान, खलील अहमद, उत्साद-ए-हदीस जामिया खानकाह रहमानी मुंगेर के मुफ्ती रेयाज अहमद कासमी सहित अन्य का योगदान सराहनीय रहा। समारोह में मोहिबुल हक, मो. फारूख आजम, साजिद रजा, अदालत हुसैन, वसील अहमद खान, डॉ. मनुतुल्लाह, शफी अहमद, जहरूल हसन, रफी अहमद, अरशद, मो. दाउद, गुलरेज शहजाद आदि उपस्थित रहे। पंडाल में प्रवेश के साथ लोगों के बीच मास्क का वितरण किया गया। इधर सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ जवान मौजूद दिखे।

Edited By Jagran

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept