सेटिग टनाटन : फोरलेन पर अनुमति 15 टन की और लदान 30 टन

बालू के बोझ तले दबे किसी तरह से चल रहे ट्रक फोरलेन के लिए नासूर बन रहे हैं। कोईलवर-छपरा फोरलेन बनने के कुछ दिन बाद ही जर्जर हो गया है। फोरलेन जर्जर होने का मुख्य कारण आए दिन ओवरलोड वाहनों का परिचालन बताया जाता है।

JagranPublish: Sat, 25 Jun 2022 11:20 PM (IST)Updated: Sat, 25 Jun 2022 11:20 PM (IST)
सेटिग टनाटन : फोरलेन पर अनुमति  15 टन की और लदान 30 टन

बड़हरा (भोजपुर) । बालू के बोझ तले दबे किसी तरह से चल रहे ट्रक फोरलेन के लिए नासूर बन रहे हैं। कोईलवर-छपरा फोरलेन बनने के कुछ दिन बाद ही जर्जर हो गया है। फोरलेन जर्जर होने का मुख्य कारण आए दिन ओवरलोड वाहनों का परिचालन बताया जाता है। अल सुबह रोज सैकड़ों की तादाद में असेवरलोड ट्रक दौड़ते हैं और स्थानीय प्रशासन, परिवहन तथा खनन विभाग मूकदर्शक बना रहता है। इससे सरकार को भी करोड़ों का नुकसान होता है। आम लोग भी धूल तथा बालू से परेशान रहते हैं और ट्रकों के सरपट भागने से हादसे भी हो रहे हैं।

कोईलव- छपरा फोरलेन पर चालान बंद हो जाने के बाद भी ओवरलोड बालू लदे वाहन स्थानीय पुलिस के सामने से गुजरती है। इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है। जर्जर सड़क पर ओवरलोड वाहनों के द्वारा ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाना आम बात है। इस दौरान आए दिन छोटी बड़ी घटनाएं होती रहती। लोगो ने बताया कि चोरी का ओवरलोड बालू लेकर ट्रक तेजी से रॉन्ग साइड से आते-जाते है। इस दौरान छोटी बड़ी घटनाएं आए दिन होती रहती है। इन घटनाओं पर स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है। विगत 15 दिनों में इस फोरलेन पर दो युवकों को ओवरलोड बालू लदे वाहनों ने कुचल दिया।

शनिवार के सुबह 6 बजे भी ओवरलोड बालू लदे एक ट्रक वाहन ने काम पर जा रहे मजदूर को कुचल दिया। इस दौरान मजदूर गंभीर रूप से जख्मी हो गया। जिसे बड़हरा थाना पुलिस ने आनन-फानन में पीएचसी बड़हरा में इलाज कराया। इस दौरान मजदूर की स्थिति देखते हुए डॉक्टरों ने सदर अस्पताल आरा रेफर कर दिया। जहां से चिताजनक स्थिति में मजदूर को डॉक्टर ने पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया है। खनन निरीक्षक अनूप त्रिपाठी ने बताया कि हमारे पास इसकी जानकारी नहीं है।

Edited By Jagran

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