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पूर्णिया में सभी पुस्कालय का बदल रहा लूक, बड़े पैमाने पर हो रही पुस्तकों की खरीद, इन लोगों को संचालय की जिम्‍मेवारी

पूर्णिया के सभी पुस्तकालय का लूक जल्द बदल जाएगा। इसके लिए कवायद शुरू कर दी गर्ठ है। हर पुस्तकालय में कम से कम 500 पुस्तकें रखने की योजना है ।इसमें काम करने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षक वार्ड सदस्य एवं वालंटियर से अपेक्षित सहयोग प्राप्त किया जा रहा है ।

Abhishek KumarSun, 10 Oct 2021 01:41 PM (IST)
पूर्णिया में सभी पुस्कालय का बदल रहा लूक, बड़े पैमाने पर हो रही पुस्तकों की खरीद, इन लोगों को संचालय की जिम्‍मेवारी

जागरण संवाददाता, पूर्णिया। बिहार मैथमेटिकल सोसाइटी व जिला शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आनलाइन प्रशिक्षण सह वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें जिलाधिकारी राहुल कुमार भी मौजूद रहे। डीएम ने कहा कि पूर्णिया जिला में गांव-गांव पुस्तकालय खुलवाने के सपनों को धरातल पर उतारा गया है। अब तक करीब एक लाख से अधिक पुस्तकें जमा की गई है। जिले के पंचायत भवन व सामुदायिक भवन को इसके लिए चिन्हित किया गया है। हर पुस्तकालय में कम से कम 500 पुस्तकें रखने की योजना है ।इसमें काम करने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षक, वार्ड सदस्य एवं वालंटियर से अपेक्षित सहयोग प्राप्त किया जा रहा है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी श्याम बाबूराम ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्थानीय विद्वत जन के अपेक्षित सहयोग से शैक्षणिक गतिशीलता आगे बढ़ सकती है। डा. विजय कुमार संयोजक सह संयुक्त सचिव बिहार मैथमेटिकल सोसाइटी ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में गणित के प्रति अभिरुचि पैदा करना एवं ग्रामीण क्षेत्र के गरीब बच्चों को शिक्षा के प्रति उन्मुख करना है । प्रो. एस के सुमन, विभागाध्यक्ष गणित विभाग, पूर्णिया विश्वविद्यालय ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में सेमिनार एवं कार्यशाला एवं आनलाइन क्लासेस के माध्यम से बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा दी जा रही है।

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ की उपाध्यक्ष नूतन आनंद ने कहा कि साइकिल, पोशाक , मध्यान भोजन एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं से बच्चों के नामांकन में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, परंतु गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए विचार करने की आवश्यकता है। मुख्य प्रशिक्षक सह आईआईटी रुड़की के पूर्व प्रो. आर सी मित्तलने कहा कि क्यूबिक इक्वेशन को हल करने के लिए सामान्य सल्यूशन नहीं है। इन कार्यों की जड़ों को खोजने का तरीका सदियों से आसपास रहा है।

इतालवी गणितज्ञों निकोलो टार्टाग्लिया और •ाोरोलामो कार्डानो द्वारा लगभग 500 साल पहले की खोज की गई, यह प्रक्रिया कुछ यूनानियों और रोमियों द्वारा नहीं जानी गई थी। क्यूबिक समीकरणों को सुलझाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही ²ष्टिकोण (और थोड़ा मूल ज्ञान) के साथ, अजीब लोगों को भी महारत हासिल हो सकती है। डा. अंजुलिका गुप्ता एलुमनाई आईआईटी कानपुर ने फंडामेंटल थ्योरम आफ कैलकुलस पर चर्चा की।

जीएलएम कालेज, बनमनखी के डा. उदय नारायण ङ्क्षसह ने बताया कि अभ्यर्थी टीएसटीएम ओलंपियाड एवं टैलेंट नर्चर कार्यक्रम (कक्षा छह से 12, वीं. एससी एवं एम.एससी तथा प्रतियोगिता परीक्षा) के लिए आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। साथ ही आफलाइन आवेदन वेबसाइट से डाउनलोड कर परीक्षा नियंत्रक बिहार, मैथमेटिकल सोसायटी कालेज आफ कामर्स आट््र्स एंड साइंस पटना को भेज सकते हैं। कार्यक्रम में राम शरण मेहता जिला सचिव एवं मु. शमीम अख्तर प्रमंडलीय सचिव बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के साथ-साथ कई अन्य शिक्षक व छात्र मौजूद थे।

 

Edited By: Abhishek Kumar

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