कटिहार के निबंधित नर्सरी से नहीं खरीदे जा रहे पौधे, संचालकों में हताशा

कटिहार में नर्सरी संचालक हताश और निराश हैं। जिले में नियम के मुताबिक एक हजार रूपए शुल्क अदा कर कई नर्सरी संचालकों ने अपना निबंधन कराया है। लेकिन इसके बाद भी सरकारी स्‍तर पर इन नर्सरी से पौधे की खरीद नहीं की जा रही है।

Abhishek KumarPublish: Thu, 03 Dec 2020 05:14 PM (IST)Updated: Thu, 03 Dec 2020 05:14 PM (IST)
कटिहार के निबंधित नर्सरी से नहीं खरीदे जा रहे पौधे, संचालकों में हताशा

कटिहार [प्रदीप गुप्ता]। विभाग के प्रतिकूल रवैए से जिले के निबंधित नर्सरी के संचालकों में हताशा व्याप्त है। विभाग द्वारा सिर्फ नर्सरी का निबंधन कर अपने दायित्व का इति श्री कर लिया जाता है। आवश्यकता अनुसार पौधे दूसरे जिलों के नर्सरी से मंगा लिए जाते हैं। इस स्थिति के कारण विभाग की अपनी तीन नर्सरी भी पूरी तरह अनुपयोगी हो चुका है। फिलहाल इस स्थिति के कारण अधिकांश नर्सरी संचालक इस व्यवसाय से मुंह मोडऩे लगे हैं।

जिले के कई नर्सरी संचालकों ने कराया है निबंधन

जिले में नियम के मुताबिक एक हजार रूपए शुल्क अदा कर कई नर्सरी संचालकों ने अपना निबंधन कराया है। इसमें मेसर्स विश्वनाथ नर्सरी खेरिया कोढ़ा, मेसर्स वाटिका नर्सरी खेरिया, मेसर्स अंकुर नर्सरी पचमा, मेसर्स उषा हटिकल्चर नर्सरी प्राणपुर आदि शामिल हैं। इसमें हर तीन साल पर रेनुअल कराने का भी प्रावधान है। इधर विभाग द्वारा पौधे की खरीद नहीं किए जाने से कई संचालकों ने इसका रेनुअल भी नहीं कराया है।

जिले में काफी तादाद में रहती है पौधे की आवश्यकता

बागवानी मिशन के तहत कई तरह के पौधे किसानों को मुहैया कराए जाते हैं। हर वर्ष वैशाली, हाजीपुर, पटना आदि जगह से आम, लीची, टिशूकल्चर केले, पपीता, टमाटर, बैगन,सहित लकड़ी़, फलदार वृक्ष के साथ सब्जी के पौधे यहां मंगाए जाते हैं। इसके आलावा मनरेगा योजना के तहत भी पंचायत में पौधारोपण कराया जाता है। इन पौधों की उपलब्धता अभी तक स्थानीय स्तर पर निबंधित नर्सरी से नहीं कराया जाता है।

मृतप्राय है तीनों सरकारी नर्सरी

जिले में उद्यान विभाग की तीन नर्सरी है और अभी तक तीनों मृतप्राय स्थिति में है। इसमें कार्यालय के समीप मौजूद नर्सरी को इस बार चालू कर 25 हजार आम व पांच हजार लीची के पौधे तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्राणपुर स्थित नर्सरी में मातृ पौधा तैयार करने की तैयारी है। एक नर्सरी पूरी तरह बंद है।

क्या कहते हैं नर्सरी संचालक

शहर के उदामा रखा परतैली के न्यू अमरबाग नर्सरी के संचालक बिनोद कुमार ने बताया कि विभाग में निबंधन कराने के बाद भी स्थानीय स्तर के नर्सरी से पौधे की आपूर्ति नहीं कर दूसरे जिले से पौधे की आपूर्ति की जाती है। इससे स्थानीय नर्सरी संचालक को कोई लाभ नहीं मिल पाता है । स्थानीय स्तर पर ही लोगों से सर्पक कर पौधे की बिक्री की जाती है। औसतन पांच लाख पौधे दूसरे जिलों से मंगाए जाते हैं।

 

विभागीय आदेशानुसार अधिकांश पौधे बाहर के जिले के सरकारी नर्सरी से आपूर्ति की जाती है। इस साल कोशिश है कि उद्यान विभाग की नर्सरी से लाभुक किसानों को हर प्रकार के पौधे उपलब्ध कराए जाएं। स्थानीय नर्सरी संचालक को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले, यह प्रयास किया जाएगा। 

डा. राहुल कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारी। 

Edited By Abhishek Kumar

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