मधेपुरा: सरकारी विभागों में खाली पड़े हैं कई पद, नियोजनालय में भी युवा नहीं करा रहे नाम दर्ज

मधेपुरा के सरकारी विभागों में कई पद खाली हैं। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। साथ ही लोगों की परेशानी भी बढ़ रही है। वहीं नियोजनालय में भी युवा अपना नाम दर्ज कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

Abhishek KumarPublish: Sat, 29 Jan 2022 07:32 AM (IST)Updated: Sat, 29 Jan 2022 07:32 AM (IST)
मधेपुरा: सरकारी विभागों में खाली पड़े हैं कई पद, नियोजनालय में भी युवा नहीं करा रहे नाम दर्ज

संवाद सूत्र, मधेपुरा। जिले में बेरोजगारों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। आलम यह है कि एक तरफ जहां विभिन्न कार्यालयों में कर्मियों के सैकड़ों पद खाली हैं वहीं दूसरी ओर कुल आबादी के केवल 0.49 प्रतिशत बेरोजगारों ने ही नियोजनालय में अपना नाम दर्ज कराया है। यद्यपि यह आंकडे तो केवल सरकारी फाईलों का शोभा बढ़ा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि बेरोजगारों की संख्या लाखों में है। इसमें शिक्षित बेरोजगारों की संख्या काफी अधिक है।

सरकार ने मनरेगा के माध्यम से हजारों मजदूरों को रोजगार देने का प्रयास किया है ङ्क्षकतु जमीनी हकीकत इससे काफी दूर है। इसके अतिरिक्त बेरोजगारी भत्ता के लिए 8981 युवाओं ने डीआरसीसी यानी जिला सूचना व नियोजन कार्यालय में आवेदन किया है। इसमें से केवल 7,466 बेरोजगार का आवेदन स्वीकृत किया गया है और 1514 आवेदकों का आवेदन अस्वीकृत कर दिया गया है। सरकारी आंकड़ों का माने तो जिले की जनसंख्या 19,94,618 है।

इसमें युवाओं और बेरोजगारों की संख्या लगभग 70 प्रतिशत है। जिला नियोजन पदाधिकारी रोहित कुमार ने बताया कि वित्तीय साल 2019-20, 2020-21 तथा 2021-22 में केवल 9844 बेरोजगारों ने नियोजनालय में अपना नाम दर्ज कराया है। इससे पूर्व का आंकड़ा कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। समय-समय पर इन्हीं बेरोजगारों को प्राइवेट कंपनियों द्वारा नियोजन मेला लगाकर नियोजन के लिए बुलाया जाता है और हर बार दो से तीन दर्जन के करीब युवाओं की बहाली काफी कम वेतन पर की जाती है। इससे बेरोजगारी के प्रतिशत पर अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है।

राजस्व कार्यालयों में खाली पड़े हैं कर्मियों के पद

प्रशासन के आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में राजस्व कर्मचारियों के 160 पद श्रृजित है। इससे से 135 पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर कर्मचारियों के नहीं रहने के कारण जमीनदारों को दाखिल-खारिज कराने तथा जमीन की लगान देने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा अमीन के श्रृजित 30 पदों में से 20 पद खाली पड़े हैं। वहीं लिपिक के 70 पद खाली रहने के कारण विभागीय कार्यों का निष्पादन समय से नहीं हो पा रहा है। राजस्व कर्मियों के पद खाली रहने के कारण सरकार को अपेक्षित राजस्व की प्राप्ति भी नहीं हो पाती है।

पंचायती राज व्यवस्था को एक ओर सरकार ने सु²ढ़ करने का फैसला किया है। ङ्क्षकतु स्थिति यह है कि पंचायत सचिव के श्रृजित 160 पदों में से केवल 54 पदों पर सचिव कार्यरत है। जबकि 106 पद खाली पड़े हैं। वहीं प्रखंड पंचायती राज पदाघिकारी के श्रृजित 13 पदों के आलोक में से आठ पद खाली पड़े हैं।

स्वास्थ्य विभाग में भी है चिकित्सक व कर्मियों के पद खाली

स्वास्थ्य विभाग की स्थिति नाजुक है। यहां लिपिक के 86 पद श्रृजित है। इसमें से केवल 14 लिपिक कार्यरत हैं जबकि बांकी पद खाली पड़े हैं। जिले में एएनएम के 923 पद श्रृजित हैं इससे से 50 प्रतिशत स्थान पर ही एएनएम की बहाली की गई है। बांकी स्थानों पर एएनएम के नहीं रहने के कारण शहर से लेकर देहाती क्षेत्रों तक लोगों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक चिकित्सकों का अकाल है। यही कारण है कि मरीज यत्र-तत्र इलाज करा कर मौत को आमंत्रित कर रहे हैं।

निर्वाचन विभाग में भी है कर्मियों की कमी

जानकारी के अनुसार जिले में उपनिर्वाचन पदाधिकारी के एक, अवर निर्वाचन पदाधिकारी के दो, वरीय लिपिक के एक, कनीय लिपिक के तीन तथा प्रचारी के तीन पद श्रृजित हैं। इसमें से अवर निर्वाचन पदाधिकारी के एक तथा कनीय लिपिक के दो पद खाली पड़े हैं। इससे निर्वाचन संबंधी कार्यों के निपटारा में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा शिक्षा विभाग, माप-तौल विभाग, गव्य विकास, पुलिस विभाग, प्रखंड, अंचल तथा अनुमंडल में भी कर्मचारियों के दर्जनों श्रृजित पद सालों से खाली पड़े हैं।

 

Edited By Abhishek Kumar

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept