आज सादगी पूर्वक मनाई जाएगी सहीद सतीश की जयंती

संसू बाराहाट (बांका) देश के लिए प्राणों की आहुति देने वाले रणबांकुरों में खड़हारा गांव का सतीश चंद्र झा की शहादत पर बांका वासियों को आज भी गर्व है। मंगलवार को उनकी जयंती सादगी पूर्वक मनाई जाएगी।

JagranPublish: Sun, 23 Jan 2022 10:28 PM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 10:28 PM (IST)
आज सादगी पूर्वक मनाई जाएगी सहीद सतीश की जयंती

सतीश झा की जयंती पर विशेष

संसू, बाराहाट (बांका): देश के लिए प्राणों की आहुति देने वाले रणबांकुरों में खड़हारा गांव का सतीश चंद्र झा की शहादत पर बांका वासियों को आज भी गर्व है। मंगलवार को उनकी जयंती सादगी पूर्वक मनाई जाएगी।

शहीद सतीश चंद्र झा का जन्म 25 जनवरी 1925 को खड़हारा में त्रिपुरा देवी और जगदीश प्रसाद झा के घर हुआ था। शिक्षा ग्रहण के उद्देश्य से वे अपने माता-पिता के साथ पटना चले गए। पटना के सचिवालय पर तिरंगा फहराने के क्रम में पटना कालेजियेट के सात छात्रों ने अंग्रेजों की गोलियों को झेलते हुए तिरंगा फहराने में कामयाब हुए थे। कहा जाता है कि महात्मा गांधी ने 1942 में आरपार की लड़ाई के लिए भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव रखा। उसी समय सतीश भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल होकर जंगे आजादी में कूद पड़े। सतीश महज 17 साल की उम्र में ही 11 अगस्त 1942 को भारत के आजादी के लिए शहीद हुए थे। पटना में सात शहीद का स्मारक भारत की लडाई के इतिहास के जिदा दस्तावेज है। इन सात प्रतिमाओं में से तीसरे नंबर वाले मूर्ति शहीद सतीश झा की है। पटना के तत्कालीन जिलाधिकारी डब्लूजी ओथर के आदेश पर सातों को पुलिस ने गोलियों से भून डाला था। इसमें उमाकांत सिंह, रामानंद सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगपति कुमार, देवीपद चौधरी, राजेंद्र सिंह, और रामगोविद थे।

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ढाकामोड़ चौक पर है शहीद सतीश का स्मारक

भागलपुर-दुमका एनएच पर ढाकामोड़ चौक पर अमर शहीद सतीश के सम्मान में 1983 में तत्कालीन केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री चंद्रशेखर सिंह ने उनकी प्रतिमा का अनावरण किया था। इसके अलावा खड़हारा गांव में शहीद सतीश द्वारा व एक बालिका प्रोजेक्ट स्कूल भी खोले गए। स्थानीय लोगों ने कई बार बाराहाट जंक्शन का नाम शहीद सतीश रखने की मांग की। पर इस ओर कुछ नहीं हुआ। स्वजन महेश्वरी झा ने बताया कि अभी शहीद सतीश की निशानी के तौर पर उनके पास महज 11 अगस्त 1997 को विधानसभा अध्यक्ष देवनारायण यादव द्वारा दिए गए सात शहीद के शहीद स्मारक चिन्ह बचे हैं। शहीद सतीश के भतीजे महेश्वरी झा ने बताया कि शहीद सतीश पढ़ने में मेधावी थे। जिसके कारण उन्हें कई बार पुरस्कृत भी किया गया था। पुजारी झा व रवि झा ने बताया कि आज उनके परिवार को देखनेवाला कोई नहीं है।

Edited By Jagran

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