औरंगाबाद से सात बार सांसद रहे थे सत्येंद्र बाबू

महासमर पेज के लिए- फोटो 15 एयूआर 04 1952 में पहली बार जीत का लहराया परचम 1980 म

JagranPublish: Fri, 15 Mar 2019 06:08 PM (IST)Updated: Fri, 15 Mar 2019 06:08 PM (IST)
औरंगाबाद से सात बार सांसद रहे थे सत्येंद्र बाबू

महासमर पेज के लिए-

फोटो : 15 एयूआर 04

1952 में पहली बार जीत का लहराया परचम

1980 में जनता पार्टी के टिकट पर बने सांसद

1984 में सांसद बनने के बाद दो बार हारे सनोज पांडेय, औरंगाबाद : औरंगाबाद की राजनीति में बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिंह के परिवार का दबदबा काफी प्रभावशाली रहा है। आजादी के बाद से इस परिवार का बिहार की राजनीति में स्थान रहा है। बिहार विभूति के पुत्र सत्येंद्र नारायण सिन्हा 1950 में पहली बार औरंगाबाद से मनोनीत सांसद बने थे। 1952 में आजाद भारत में पहली बार लोकसभा का चुनाव हुआ। कांग्रेस के टिकट पर सत्येंद्र नारायण सिन्हा उर्फ छोटे साहब चुनाव लड़े और जीत गए। उन्होंने सपा के विलास सिंह को पराजित किया। 1957 में एक बार फिर छोटे साहब कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे। उनके सामने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रामस्वरुप सिंह मैदान में थे। इस चुनाव में भी छोटे साहब को ही जीत हासिल हुई। इसके बाद छोटे साहब राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे। 1961 में विधायक बने। उसके बाद बिहार सरकार में पहली बार शिक्षा मंत्री के पद पर मनोनीत हुए। शिक्षा मंत्री रहते उन्होंने राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में काफी विकास किया। वे दस वर्षो तक केंद्र की राजनीति से दूर रहे। 1971 में एक बार फिर संगठन कांग्रेस से लोकसभा चुनाव लड़े। जिसमें कांग्रेस के ही मुंद्रिका सिंह को पराजित किया। उसके बाद 1977 में जनता दल से चुनाव लड़े और कांग्रेस के रामस्वरुप यादव को पराजित किया। छोटे साहब लगातार दल बदलकर चुनाव लड़े और जीते। फिर 1980 में वे जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े। और कांग्रेस के सिद्धनाथ सिंह को पराजित किया। 1984 में एकबार फिर पाला बदलकर कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और जीत हासिल की। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की हत्या के कारण पूरे देश में कांग्रेस लहर थी। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समिति में एशिया का प्रतिनिधित्व करने वाले छोटे साहब 11 मार्च 1989 को बिहार के मुख्यमंत्री बने। और छह दिसंबर 1989 तक बिहार के सीएम रहे। इनके सीएम रहते 1989 में लोकसभा का चुनाव हुआ। कांग्रेस के टिकट पर इनकी बहू श्यामा सिंह मैदान में उतरीं, परंतु जनता दल के रामनरेश सिंह से चुनाव हार गई। सीएम रहते नवीनगर में सुपर थर्मल पावर परियोजना का प्रस्ताव रखा था जो अब धरातल पर दिख रहा है। बिहार की राजनीति में सत्येंद्र बाबू का हमेशा दबदबा रहा है। जिस कारण औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र को मिनी चितौड़गढ़ के नाम से जाना जाता है। 1991 व 1996 में हार गए चुनाव

औरंगाबाद : औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र से सात बार सांसद रहे सत्येंद्र नारायण सिन्हा उर्फ छोटे साहब 1991 में पहली बार चुनाव हार गए। कांग्रेस के टिकट पर वे मैदान में थे। वर्तमान सांसद रामनरेश सिंह ने उन्हें पराजित किया। 1996 में एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे। परंतु जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे वीरेंद्र कुमार सिंह (वर्तमान नवीनगर विधायक) ने पराजित कर दिया। 1996 की हार के बाद छोटे साहब कभी चुनाव नहीं लड़े। 04 सितंबर 2006 को उनका निधन हो गया।

Edited By Jagran

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