ऑटोमोबाइल्स इलेक्ट्रिक इंडस्ट्री में प्रवेश कर सकते हैं गौतम अडानी, ट्रेडमार्क हुआ रजिस्टर्ड

समूह की प्रारंभिक इलेक्ट्रिक वाहन योजनाओं में कोच बसें और ई-ट्रक शामिल हैं। जिनका उपयोग बंदरगाहों हवाई अड्डों आदि पर किया जाएगा। गौतम अडानी के नेतृत्व वाला समूह इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी का निर्माण करना चाहता है और पूरे भारत में चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना बना रहा है।

Atul YadavPublish: Sat, 22 Jan 2022 08:57 AM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 12:26 PM (IST)
ऑटोमोबाइल्स इलेक्ट्रिक इंडस्ट्री में प्रवेश कर सकते हैं गौतम अडानी, ट्रेडमार्क हुआ रजिस्टर्ड

नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने ग्राहकों का टेस्ट बदलने के लिए इलेक्ट्रिक बाजर में प्रवेश कर रही है। ईवी बाजर में कई दिग्गज वाहन निर्माता प्रवेश कर चुके हैं तो, कई स्टार्ट-अप कंपनियां भी इसमें अपना लक आजमा रही हैं। इसी क्रम में भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्त अडानी समूह के मुखिया भी इस बाजार में प्रवेश करने का संकेत दे रहे हैं। रिपोर्ट्स की माने तो, समूह इकाई एसबी अडानी ट्रस्ट को 'अडानी' नाम का उपयोग करने के लिए ट्रेडमार्क भी मिल गया है। यह कदम ग्रीन प्रोजेक्ट्स में अडानी समूह की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

ईवी स्पेस में एंट्री की तैयारी?

ट्रेडमार्क की मंजूरी मिलने बाद कयास लगाया जा रहा है कि अडानी समूह  ग्रीन प्रोजेक्ट में व्यापक कदमों के हिस्से के रूप में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्पेस में प्रवेश करना चाहता है। समूह की प्रारंभिक इलेक्ट्रिक वाहन योजनाओं में कोच, बसें और ई-ट्रक शामिल हैं। जिनका उपयोग बंदरगाहों, हवाई अड्डों आदि पर आंतरिक रसद गतिविधियों के लिए किया जाएगा। गौतम अडानी के नेतृत्व वाला समूह इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी का निर्माण करना चाहता है और पूरे भारत में चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना बना रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि समूह की गुजरात के मुंद्रा में अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में अपनी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी परियोजनाओं के लिए एक अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) सुविधा स्थापित करने की भी योजना है।

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और टाटा जैसे अन्य व्यावसायिक घरानों ने भी कम कार्बन वाली हरित परियोजनाओं की योजना बनाई है। आपको बता दें कि कॉमर्सियल व्हीकल्स के क्षेत्र में इस समय में टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड का वर्चस्व है।

डीजल-इलेक्ट्रिक में इतने का अंतर

डीजल पर चलने वाले कॉमर्सियल वाहनों के संचालन की लागत 4 रुपये प्रति किलोमीटर है, वहीं इसकी  तुलना में इलेक्ट्रिक कमर्सियल वाहनों की लागत 80 पैसे प्रति किमी है।

सब्सिडी ने ई-सीवी के संचालन की कुल लागत को कम करने में भी भूमिका निभाई है। बसें भी इस क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा हैं।  एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज (ईईएसएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज ने हाल ही में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु में 5,450 सिंगल-डेकर और 130 डबल-डेकर इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 5,450 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी निविदा की घोषणा की।

Edited By Atul Yadav

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