Traffic Rule: इस राज्य में बगैर PUC के वाहन चलाना पड़ेगा भारी, 10 हजार का कट रहा है चालान

याद रखिए कि भले ही आपका वाहन प्रदूषण नहीं फैला रहा हो पर अगर आपके पास प्रमाणपत्र नहीं हो या उसकी अवधि पूरी हो गई हो तब भी आपके ऊपर चालान लग सकता है। इसलिए प्रमाणपत्र बनवाना जरूरी है।

Atul YadavPublish: Sat, 28 May 2022 02:09 PM (IST)Updated: Sun, 29 May 2022 07:30 AM (IST)
Traffic Rule: इस राज्य में बगैर PUC के वाहन चलाना पड़ेगा भारी, 10 हजार का कट रहा है चालान

नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। प्रत्येक वाहन मालिकों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) बनवाना अनिवार्य है। बगैर पीयूसी प्रमाणपत्र के पकड़े जाने वाली गाड़ियां भारी चालान का सामना करती हैं। वहीं अब राजधानी दिल्ली में बिना पीयूसी के गाड़ी पकड़ी जाएगी तो उसे 10 हजार रुपये का चालान कटेगा

यातायात पुलिस ने बगैर प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में लापरवाही करने वालों को छूट नहीं मिलेगी और बगैर पीयूसी प्रमाणपत्र वाले वाहनों का 10 हजार का चालान कट रहा है।

कैसे बनवाएं पीयूसी प्रमाणपत्र

पीयूसी प्रमाणपत्र बनवाना बेहद आसान है और इसके लिए अपने नजदीकी पेट्रोल पंप या प्रदूषण केंद्र में जाकर बनवा सकते हैं। अगर आपका वाहन पेट्रोल से चलता है तो आपको प्रमाणपत्र के लिए 35 रुपये खर्च करने होंगे। डीजल के वाहनों के लिए 50 रुपये। अन्य राज्यों में यह कीमत अलग हो सकती है। याद रखिए कि भले ही आपका वाहन प्रदूषण नहीं फैला रहा हो, पर अगर आपके पास प्रमाणपत्र नहीं हो या उसकी अवधि पूरी हो गई हो तब भी आपके ऊपर चालान लग सकता है। इसलिए प्रमाणपत्र बनवाना जरूरी है।

पिछले साल संशोधित हुआ था नियम

मिनिस्ट्री ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज (MoRTH) ने देश भर में चल रहे सभी वाहनों के लिए एक ही पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) प्रमाण पत्र के उपयोग को पिछले साल 2021 में मंजूरी दे दी थी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा था कि पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) प्रमाणपत्र को भी राष्ट्रीय रजिस्टर के साथ पीयूसी डेटाबेस से जोड़ा जाएगा।

सड़क मंत्रालय द्वारा केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में बदलाव के बाद अब पीयूसी फॉर्म पर एक क्यूआर कोड छपा होगा और इसमें वाहन, मालिक और उत्सर्जन की स्थिति का विवरण होगा। नये पीयूसी में वाहन मालिक का मोबाइल नंबर, नाम व पता, इंजन नंबर और चेसिस नंबर भी होगा। इससे किसी को भी डेटाबेस से किसी विशेष वाहन के बारे में विवरण प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

Edited By Atul Yadav

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