सेकेंड हैंड कार खरीदने के आसान टिप्स, अच्छी डील के लिए बस इन बातों का रखें ध्यान

यदि आप एक सेकेंड हैंड कार खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको इसकी कई चीजों पर ध्यान देना चाहिए। यहां आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसी आसान टिप्स जिनकी मदद से आप एक अच्छी रकम पर पुरानी कार खरीद सकते हैं। तो आइए जानें

Sarveshwar PathakPublish: Mon, 24 Jan 2022 05:47 PM (IST)Updated: Tue, 25 Jan 2022 07:07 AM (IST)
सेकेंड हैंड कार खरीदने के आसान टिप्स, अच्छी डील के लिए बस इन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। अगर आप पुरानी कार खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। किसी भी पुरानी कार को खरीदने से पहले सही तरीके से उसकी जांच करनी चाहिये। ज्यादातर ऑटोमोबाइल कंपनियों ने सेकेंड हैंड कारों के लिए खुद के शोरूम खोल दिए हैं। अगर आप भी सेकेंड कार खरीदने पर विचार कर रहे हैं तो इसे आप कहीं से भी ले सकते हैं। लेकिन खरीदते समय आपको कुछ बातों को जहन में रखना चाहिए, कार की जांच के लिए सिर्फ टेस्ट ड्राइव काफी नहीं है। आइये जानते हैं ऐसी बातों के बारे में जो पुरानी कार खरीदते समय आपको जरूर दिमाग में रखनी चाहिये।

गाड़ी में आने वाली आवाज पर ध्यान दें

गाड़ी को स्टार्ट कर न्यूट्रल गियर पर छोड़ दें और अंदर बैठखकर केबिन में आने वाली आवाज और वाइब्रेशन पर ध्यान दें. इसके बाद एक्सीलेटर को कम और ज्यादा करते हुए विंडो खोलकर और बंदकर आने वाली आवाज सुनें. अगर किसी भी तरह का एक्सट्रा नॉइज और वाइब्रेशन महसूस हो तो कार डीलर से बात करें। कार खरीदते समय जब टेस्ट ड्राइव की बात हो तो आप जल्दबाजी में कभी भी छोटी दूरी का टेस्ट ड्राइव ना लें। कम से कम 30 किलोमीटर की टेस्ट ड्राइव जरूर लें. इससे आप गाड़ी की सही कंडीशन जान पाएंगे।

गाड़ी के धुंए को चेक करें

पुरानी कार खरीदते वक्त सबसे पहले आपको उसकी फिटनेस का ध्यान देना चाहिये। गाड़ी के साइलेंसर से निकलने वाले धुंए के रंग पर ध्यान दें। यदि धुंऐं का रंग नीला, काला है तो इंजन में किसी खराबी के कारण हो सकता है। इसके अलावा इंजन में ऑयल लीकेज की समस्या भी हो सकती है। टेस्ट ड्राइव के दौरान ध्यान दें कि ऑयल या वायर जलने की कोई बदबू तो नहीं आ रही है। इंजन की जांच करने के लिए किसी अच्छे मैकेनिक को जरूर दिखा लें।

फाइनेंस पॉलिसी

किसी भी पुरानी कार को खरीदने से पहले उसके दस्तावेज की जांच करना बेहद आवश्यक है। साथ ही कार के बीमा मूल्य को भी देखें, इससे आपको कार की कीमत के मोल-भाव के दौरान सहायता मिलेगी। इसके अलावा पिछले 2-3 साल में नो क्लेम बोनस ट्रैक करें। इससे आपको गाड़ी के एक्सीडेंट या किसी अन्य वजह से मरम्मत और रखरखाव पर होने वाले खर्च की जानकारी मिलेगी।

Edited By Sarveshwar Pathak

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