शिवलिंग की परिक्रमा करते समय ध्‍यान रखें ये बातें, नहीं होगा बुरा

Fri, 21 Jul 2017 11:38 AM (IST)

अर्द्ध परिक्रमा करते हैं शिवलिंग की

मंदिरों में पूजा करते समय अक्‍सर लोग उसकी परिक्रमा लगाते हैं। शिव मंदिर की परिक्रमा लगाने में कोई दोष नहीं है। लेकिन शिवलिंग की परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। दरअसल शिवलिंग में जल चढ़ाने के बाद वह जिस रास्‍ते से होकर बहकर जाता है उसे निर्मली कहते हैं। वहां से निकाल कहीं जमीन में गड्डा बनाकर उसमें जाने देते हैं। यदि निर्मली ढंकी हो और गुप्त रूप से बनी हो तो पूरी परिक्रमा करने पर भी दोष नहीं लगता। आप शिव मंदिर की चारों ओर परिक्रमा कर सकते हैं लेकिन शिवलिंग की निर्मली न लांघने के कारण अर्ध-परिक्रमा की जाती है। जिन शिवालयों में निर्मली की समुचित व्यवस्था नहीं होती, जल साधारण खुली नालियों की तरह बहता है उसे कदापि नहीं लांघना चाहिए। इससे दोष लगता है।

निर्मली लांघने पर क्‍या बुरा प्रभाव पड़ता है

इसको लेकर एक दंतकथा है। पुष्पदत्त नामक गन्धर्वों का एक राजा था। वह भोलेनाथ का अनन्य भक्त था। इस राजा की आदत थी कि वह भगवान शिव को प्रतिदिन पुष्‍प अर्पित करता था। उत्तम सुगंध वाले फूल लाने के लिए राजा किसी अन्य राजा की पुष्प वाटिका में जाया करता था और वहां से प्रतिदिन सुंदर-सुंदर फूल चुरा लाता था। रोजाना फूलों की चोरी होता देख माली काफी परेशान रहता। उसे बगीचे में किसी को आते-जाते न देख कर हैरानी होती। उसने इस संबंध में राजा से बातचीत की तथा फूलों की हो रही प्रतिदिन चोरी को रोकने के लिए एक गुप्तचर की व्यवस्था की जो निगरानी रखेगा कि कौन बगीचे से अच्छे-अच्छे फूल चोरी करता है परंतु गुप्तचर नियुक्त करने के बाद भी चोरी ऐसे ही होती रही। क्‍योंकि पुष्‍पदत्‍त को अदृश्‍य होने की शक्‍ित मिली थी।

 

समाप्‍त हो गई शक्‍ति

एक बार जब गन्धर्वराज भगवान शिव भोले नाथ की पूजा-अर्चना कर रहा था तो वह भूलवश शिवलिंग की निर्मली (जल प्रवाहिका) को लांघ गया जिसके फलस्वरूप उसके अदृश्य होने की शक्ति समाप्त हो गई जिसका उसे पता नहीं चला। जब वह दूसरे दिन पुष्प वाटिका में पुष्प लेने गया तो उसे पुष्प तोड़ते माली के रखे हुए गुप्तचर ने पकड़ लिया। उसने अदृश्य होने का प्रयास किया जिसमें वह सफल न हो सका। किसी तरह वह वहां से छूट गया। अगली सुबह पूजा में भगवान मृत्युजंय भोले नाथ भंडारी ने उसकी अदृश्य होने की शक्ति लुप्त हो जाने का रहस्य बतलाया।

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