• दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां होती है भोलेनाथ के पैर के अंगूठे की पूजा

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    राजस्थान के एक मात्र हिल स्टेशन माउंट आबू को अर्धकाशी के नाम से भी जाना जाता है क्योकि यहां पर भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर है। अचलेश्वर महादेव मंदिर माउंट आबू से लगभग 11 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में अचलगढ़ की पहाड़ियों पर अचलगढ़ के किले के पास स्तिथ है।

  • दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां होती है भोलेनाथ के पैर के अंगूठे की पूजा

    आज हम आपको राजस्थान के माउंट आबू के अचलेश्वर महादेव के बारे में बताएंगे जो की दुनिया का ऐसा इकलौता मंदिर है जहां पर शिवजी के पैर के अंगूठे की पूजा होती है।

  • दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां होती है भोलेनाथ के पैर के अंगूठे की पूजा

    भोलेनाथ की यहां मौजूद मूर्ति पंच धातुओं से बनी है। जहां शिव की मूर्ति है वहां उनके पैर के अंगूठे के निशा है। जिसकी पूजा-अर्चना होती है। तो आइए जानते हैं मंदिर के बारे में ओर भी रोचक बातें...

  • दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां होती है भोलेनाथ के पैर के अंगूठे की पूजा

    मंदिर में प्रवेश करते ही पंच धातु की बनी नंदी की एक विशाल प्रतिमा है, जिसका वजन चार टन है।

  • दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां होती है भोलेनाथ के पैर के अंगूठे की पूजा

    अचलेश्वर महादेव मंदिर परिसर के विशाल चौक में चंपा का विशाल पेड़ अपनी प्राचीनता को दर्शाता है।

  • दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां होती है भोलेनाथ के पैर के अंगूठे की पूजा

    स्कंद पुराण के अनुसार, जिस तरह वाराणसी शिव की नगरी है तो यह माउंट आबू उपनगरी है।

  • दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां होती है भोलेनाथ के पैर के अंगूठे की पूजा

    मान्यता है कि अंगूठे ने ही पूरे माउंट आबू पर्वत के हिस्से को थाम रखा है, जिस दिन अंगूठे का निशा गायब हो जायेगा उस दिन माउंट आबू का पहाड़ ख़त्म हो जाएगा।

  • दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां होती है भोलेनाथ के पैर के अंगूठे की पूजा

    मंदिर की बायीं बाजु की तरफ दो कलात्मक खंभो का धर्मकाटा बना हुआ है।

  • दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां होती है भोलेनाथ के पैर के अंगूठे की पूजा

    यह दुनिया का इस तरह का इकलौता मंदिर है। भगवान शंकर यहां अंगूठे में वास करते है। सावन के महीने में इस रूप के दर्शन का विशेष महत्त्व है।

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