आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई चौथा विश्वयुद्ध

Wed, 25 Jul 2012 04:27 PM (IST)

नई दिल्ली। देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आतंकवाद को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपना युद्ध जारी रखना चाहिए, क्योंकि आज आतंकवाद भारत में ही नहीं बल्कि पूरे देश में विश्व युद्ध की स्थिति पैदा कर रहा है। आतंकवाद के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई चौथा विश्वयुद्ध लड़ने जैसी है। तीसरा विश्व युद्ध एशियन देशों के बीच का शीत युद्ध था। अन्य देशों के मुकाबले भारत काफी पहले से ही आतंकवाद के दुष्परिणाम भुगत रहा है।

13वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण के दौरान प्रणब मुखर्जी ने अपने पहले भाषण में आतंकवाद के अलावा देश की दूसरी बड़ी समस्या गरीबी व अशिक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आंतकवाद के खात्मे के साथ-साथ देश को विकास की राह पर ले जाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि आज भी देश का एक बड़ा हिस्सा भुखमरी और गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर कर रहा है। ऐसे में उन्हें दो वक्त के खाने के साथ-साथ अच्छी शिक्षा देना भी जरूरी है। तभी भारत में फिर से स्वर्ण युग लौट कर आ सकेगा। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वह पूरी कोशिश करेंगे की कि देश में जितने भी निम्न वर्ग के गरीब हैं उन्हें वह किसी भी कीमत पर गरीब होने का एहसास नहीं होने देंगे।

उन्होंने कहा कि भारत आत्म समृद्ध देश है और विकास की राह पर चलने के लिए कटिबद्ध है। क्योंकि कृषि देश की अर्थनीति को मजबूत करने में एक बड़ी सहायक की भूमिका निभाती है। ऐसे में देश के कृषि क्षेत्र को आगे ले जाना काफी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि वह सिर्फ शब्दों में या भाषण में ही नहीं बल्कि कार्य को वास्तविक रूप देने में भी तत्पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार भी देश के विकास को रोक रहा है। इससे लड़ने के लिए भी हमें आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि वर्षो के युद्ध के मुकाबले कुछ क्षणों की शांति कहीं अधिक उपलब्धि मानी जा सकती है।

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