पाक की दुखती रग को छुएगी NSG में भारत की सदस्यता : चीन

Tue, 14 Jun 2016 06:24 PM (IST)

नई दिल्ली(पीटीआई)। एनएसजी में सदस्यता हासिल करने के भारत के प्रयासों से पाकिस्तान और चीन दोनों परेशान हैं। पाकिस्तान जहां भारत की कोशिशों को आलोचना कर रहा है। वहीं चीन भी भारत की राह में रोड़ा बना हुआ है। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में इस मुद्दे पर सरकार की योजना को सामने रखा है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन सरकार का मानना है कि एनएसजी में भारत के दाखिल होने से पाकिस्तान की दुखती रग को छुएगी। इसके अलावा चीन के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ होगा।

दक्षिण एशिया में परमाणु हथियारों द्वारा तनाव बढ़ने से विश्व शांति को खतरा पैदा होगा। चीन सरकार का मानना है कि पाकिस्तान ये नहीं चाहता है कि भारत एनएसजी में शामिल हो सके क्योंकि ऐसा होने पर नाभिकीय तनाव का बढ़ना स्वाभाविक है। पांच देशों की सफल यात्रा के बाद भारत ने आवश्यक समर्थन मिलने का दावा किया है। इस मामले में 24 जून को सियोल में होने वाली एनएसजी की बैठक में निर्णायक फैसला होना है। अमेरिका और एनएसजी के कुछ सदस्यों ने भारत का समर्थन किया है। लेकिन चीन के विरोध की वजह से भारत सरकार फिक्रमंद है।

पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा है परमाणु हथियारों का जखीरा

एनएसजी के मुख्यालय वियना में हुई बैठक में अमेरिका समेत ज्यादातर सदस्यों ने भारत के दावे का समर्थन किया। लेकिन चीन के साथ-साथ आयरलैंड , तुर्की, आस्ट्रिया और दक्षिण अफ्रीका ने विरोध किया है। एनएसजी की सदस्यता मिलने के बाद किसी भी राष्ट्र को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में असीमित अधिकार मिल जाते हैं। लेकिन एनएसजी के किसी भी सदस्य के विरोध करने पर दावेदारी खतरे में पड़ जाएगी। भारत इस मुहिम में जुटा है कि उसकी दावेदारी पर कोई राष्ट्र वीटो न लगाए।

ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि चीन का मानना है कि एनएसजी में दाखिल होने के लिए भारत को एनपीटी पर हस्ताक्षर करने चाहिए। लेकिन भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इन सब तथ्यों की जानकारी होने के बाद भी भारतीय मीडिया चीन को कोसने में जुटा हुआ है। भारत अपने हितों को ध्यान में रखकर परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। वो अमेरिका की मदद से अपने मकसद को हासिल कर सकता है। इसके अलावा अमेरिका का भी हित जुड़ा हुआ है।

एनएसजी में भारत को सदस्यता मिलने पर वो भारतीय बाजार का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है। व्यापारिक हितों के अतिरिक्त अमेरिका एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए भी भारत का समर्थन कर रहा है। इन सबके बीच अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता को नजरंदाज कर रहा है। ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि चीन दक्षिण एशिया में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व में विश्वास करता है। पाकिस्तान को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी सहयोग से ही पूरे इलाके का तनावरहित विकास हो सकता है।

पाक ने फिर ठोका एनएसजी में सदस्यता का दावा

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