कृषि की तस्वीर संवारेगी नीली व श्वेत क्रांति, किसानों की आय बढ़ाने में देंगी योगदान

Sat, 20 May 2017 02:03 AM (IST)

सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती की बिगड़ी सेहत को सुधारने में नीली और श्वेत क्रांति से सरकार को बड़ी उम्मीदें हैं। कृषि क्षेत्र की विकास दर को रफ्तार देने में भी इन क्षेत्रों की भूमिका अहम हो गई है। इसी के मद्देनजर कृषि क्षेत्र से जुड़े ये उद्यम सरकार की उच्च प्राथमिकताओं में शामिल कर लिये गये हैं।

श्वेत क्रांति को और तेज करने के लिए सरकार ने दुग्ध उत्पादन पर पूरा जोर दिया है। यही वजह है कि दुग्ध उत्पादन में भारत दुनिया का पहला देश हो चुका है। विश्व के कुल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 18.5 फीसद हो गई है। दुग्ध उत्पादन की सालाना विकास दर सवा छह फीसद हो गई है, जबकि विश्व दुग्ध उत्पादन की विकास दर 3.1 फीसद है।

बीते साल दुग्ध का घरेलू उत्पादन 15.55 करोड़ टन हुआ था, जबकि इसके पहले वाले साल में यह 14.63 करोड़ टन था। देश में प्रति व्यक्ति दुग्ध की उपलब्धता 337 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जो एक दशक में डेढ़ गुना हो चुकी है। देश में सालाना लगभग पांच लाख करोड़ रुपये मूल्य का दुग्ध उत्पादन हो रहा है, जो गेहूं व चावल के मुकाबले अधिक है। श्वेत क्रांति से छोटी जोत के किसानों की माली हालत में बहुत सुधार हुआ है। इसी के मद्देनजर सरकार ने पशुधन और डेयरी पर विशेष ध्यान देना शुरु किया है।

नीली क्रांति यानी मछली उत्पादन को सरकार का जबर्दस्त प्रोत्साहन है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि मछली उत्पादन से किसानों की वित्तीय हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। समुद्री मछली के साथ अब देश में मीठे पानी के जलाशयों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। देश में फिलहाल एक लाख करोड़ रुपये मूल्य का मछली उत्पादन हो रहा है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत परंपरागत ताल-तलैया, पोखर, जलाशय और झीलों के पुनरोद्धार की दिशा में बेहतर कार्य किया गया है। इनमें मछली उत्पादन हो रहा है। किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए मछली उत्पादन के लिए आम बजट में आवंटन बढ़ाकर 1700 करोड़ रुपये कर दिया है, जो पिछले साल के मुकाबले 21 फीसद अधिक है। मछली उत्पादन से जहां किसानों की आमदनी बढ़ रही है, वहीं निर्यात बढ़ा है। मछली उत्पादन बढ़ने से खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है और कुपोषण की चुनौती से निपटने में मदद मिली है।

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