एक्शन में सीएम, अखिलेश सरकार के सलाहकार बर्खास्त

Mon, 20 Mar 2017 10:31 PM (IST)

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : नई सरकार के गठन के बाद भी पदों से इस्तीफा नहीं देने वाले अखिलेश यादव सरकार के सलाहकारों और उपाध्यक्षों को पद से बर्खास्त कर दिया गया है। यादव सरकार ने 80 से अधिक कार्यकर्ताओं को विभिन्न विभागों में सलाहकार, उपाध्यक्ष आदि नियुक्त कर रखा था। सत्रहवीं विधानसभा के चुनाव में भाजपा को बहुमत के बाद बाद इनमें से तकरीबन 20 लोगों ने पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया था।

मुख्य सचिव राहुल भटनागर से की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पूर्व सरकार में विभिन्न विभागों,सार्वजनिक निगमों, परिषदों, समितियों में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नियुक्तगैर सरकारी सलाहकारों, अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। ऐसे लोगों को कार्यमुक्त कर दिया गया है।

मुख्य सचिव ने कृषि उत्पादन आयुक्त अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, आयुक्त समाज कल्याण, अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों को निर्देश दिये हैं कि सरकार के फैसले का पालन सुनिश्चित कराया जाए। ध्यान रहे, अखिलेश यादव सरकार ने 80 से अधिक लोगों को विभिन्न विभागों में सलाहकार, उपाध्यक्ष, परिषदों में सदस्य नामित कर रखा था। विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद उर्दू अकादमी के चेयरमैन नवाज देवबंदी, भाषा संस्थान के अध्यक्ष गोपाल दास नीरज, हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष उदय प्रताप समेत 20 से अधिक लोगों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। मगर, 60 से अधिक लोगों ने अब तक इस्तीफा नहीं दिया था। सरकार ने इन सभी को उनके पदों से बर्खास्त कर दिया है।

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आयोगों पर अभी फैसला नहीं

आदित्यनाथ योगी सरकार ने समाजवादी सरकार में गठित उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग, पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग, अनुसूचित जाति जन जाति आयोग, राज्य महिला आयोग, राज्य बाल संरक्षण आयोग पर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है। हालांकि इनमें से राज्य महिला आयोग व अल्पसंख्यक कल्याण आयोग में एक-एक साल के लिए ही नियुक्तियां होती हैं। अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में स्वत: खत्म हो जाएगा।

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अखिलेश यादव उस पिता के पुत्र हैं, जो यूपी की सियासत के पितामह बन चुके हैं, जिनकेपिछले 46 साल विधानसभा-लोकसभा में गुजरे हैं और जिनके बारे में यह कहा जाता है कि चुनाव प्रचार के दौरान निर्वाचन क्षेत्र में हेलीकाप्टर की लैंडिंग के साथ ही वह वहां का नतीजा बता दिया करते हैं। ऐसे में अखिलेश यादव से बेहतर भला और कौन इस राजनीतिक