समुचित सुविधाओं के साथ हो गांवों का विकास

Fri, 19 May 2017 10:38 PM (IST)

भगवान झा, पश्चिमी दिल्ली :

दिल्ली सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद 89 गांवों के शहरीकृत करने की दिशा में पहल शुरू हो चुकी है। राजधानी की आबादी व जरूरतों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है, लेकिन विकास की इस कड़ी में सरकार को काफी कुछ सोचकर कदम बढ़ाने की जरूरत है। क्या हमारे पास उतने संसाधन मौजूद हैं कि हम गांवों को शहरीकृत करने के बाद उपलब्ध करा सकें? राजधानी में अभी पानी की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। ऐसे में क्या हमारे पास सप्लाई के लिए पानी उपलब्ध रह सकेगा। क्या बिजली की आपूर्ति करने में सक्षम हैं। इसके अलावा जो सफाई की मौजूदा हालात हैं उसमें तो यह साफ दिख रहा है कि जब हम मौजूद इलाकों की सफाई करने में सक्षम नहीं हैं तो नई बसावट के बाद उसकी सफाई का क्या इंतजाम हो सकेगा। ये सभी प्रश्न हैं जो कि समय के साथ उठाए जाएंगें और सरकार को इसका जवाब भी देना होगा।

ताजातरीन मामला द्वारका का ही लें। उपनगरी द्वारका को बसाने की दिशा में 1980 में ही प्रयास शुरू हो चुके थे। लेकिन यहां पर मूलभूत समस्याओं के निस्तारण में दशकों लग गए। अभी भी हालात यह है कि उपनगरी के लोग साफ-सफाई, खुले नाले, खुले मेनहोल, सार्वजनिक परिवहन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में अगर अभी भी द्वारका के लोग समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो नई बसावट को ये सब चीजें कब तक मुहैया होगी यह सोचने की बात है। इसके अलावा पश्चिमी दिल्ली में जितने भी शहरीकृत गांव हैं वहां पर अभी भी समस्याओं का अंबार लगा रहता है। चाहे हम बात करें ¨बदापुर की या फिर मोहन गार्डन की। कई कालोनियों अभी भी अनधिकृत हैं और वहां पर मूलभूत सुविधाएं नहीं है। ऐसे में सरकार को सबसे पहले यह प्रयास करना चाहिए कि अभी की समस्याओं का निस्तारण करते हुए नई बसावट की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करे, जिससे कि लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

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