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एचयूएफ क्या है और इसे कौन बना सकता है?

Mon, 08 May 2017 05:48 PM (IST)

नई दिल्ली (बलवंत जैन)। आयकर में मिलने वाले फायदों की वजह से कई लोगों को एचयूएफ (हिंदू अनडिवाइडेड फैमली) के बारे में जानने की विशेष जिज्ञासा रहती है। चलिए एचयूएफ के बारे में विस्तार से जानते हैं। कोई भी व्यक्ति जो हिंदू है वह ही सिर्फ एचयूएफ रख सकता है। एचयूएफ के लिए सभी जैन, सिख, एवं बौध भी हिंदू माने जाते हैं और वो भी एचयूएफ रख सकते है। परंतु कोई भी व्यक्ति जो मुस्लिम, पारसी या ईसाई घर्म पालता है एचयूएफ नहीं रख सकता है।

एक एचयूएफ में एक साथ सात पीढ़िया उसकी सदस्य हो सकती हैं। जो भी व्यक्ति एक हिंदू परिवार में पैदा होता है वह एचयूएफ का सदस्य हो सकता है। इसके अलावा जो महिलाएं शादी करके उस घर में आती है वो भी उस एचयूएफ की सदस्य बन जाती है।

हिंदू उत्तराधिकार कानून में 2005 में संशोधन किया गया जिसके पश्चात लड़कियों को भी लड़के के बराबर के अधिकार एचयूएफ में मिलते हैं।

एचयूएफ में सदस्य के अलावा coparcener का भी एक सिद्धान्त होता है, कोपारस्नर के अधिकार सदस्य के अधिकार से ज्यादा होते हैं। एक सदस्य को एचयूएफ में से भरणपोषण का अधिकार ही होता है परंतु एक कोपारस्नर को एचयूएफ की संपत्ति का बंटवारा मांगने का भी हक होता है। यह अधिकार एचयूएफ के सदस्य को नहीं होता है परंतु बंटवारा होने की स्थिति में सदस्य को भी कोपारस्नर के बराबर का हिस्सा एचयूएफ की संपत्ति में से मिलता है। एचयूएफ का संचालन व प्रबंधन एचयूएफ के सबसे वरिष्ठ सदस्य द्वारा किया जा रहा है जिसे एचयूएफ का कर्ता कहते हैं। कानून में संशोधन के पश्चात परिवार की बेटी भी एचयूएफ की कर्ता बन सकती है और एचयूएफ का प्रंबधन कर सकती हैं।

बेटी की शादी होने के पश्चात भी वह अपने पिता की एचयूएफ की सदस्य बनी रहेगी और अपने पति के एचयूएफ की सदस्य भी बन जाएगी।

एचयूएफ की संपत्ति व आय का इस्तेमाल कर्ता अपने विवेक के हिसाब से सदस्यों के भरणपोषण, पढ़ाई एवं शादी-ब्याह के लिए कर सकता है। एचयूएफ के लिए परिवार में एक से ज्यादा कोपारस्नर होना जरूरी है अत: जैसे ही नये युगल के घर में कोई भी बच्चा जन्म लेता है चाहे वो बेटा हो या बेटी उनकी एचयूएफ बन जाती है परंतु अगर पुरुष के पास पहले से ही कोई पैतृक संपत्ति है तो उसके शादी करते ही उसकी एचयूएफ अस्तित्व में आ जाती हैं। एचयूएफ अपने परिवार के सदस्यों के अलावा और लोगों से भी गिफ्ट स्वीकार कर सकता है।

एक व्यक्ति एक ही समय में एक से ज्यादा एचयूएफ का सदस्य हो सकता है। इसके अलावा एक ही व्यक्ति एक ही समय में एक से ज्यादा एचयूएफ का कर्ता भी हो सकता है। सदस्यों या कर्ता की मृत्यु होने की वजह से एचयूएफ के अस्तित्व में कोई फर्क नहीं आता है। कर्ता की मृत्यु के पश्चात वरिष्ठ कोपारस्नर को उस एचयूएफ का कर्ता बनाया जा सकता है। जो व्यक्ति शादी करके एचयूएफ का सदस्य बनती है वह एचयूएफ का कर्ता नहीं बन सकती परंतु अपने नाबालिग की तरफ से एचयूएफ की संपत्ति का प्रबंधन कर सकती है।

जबतक एचयूएफ की सारी संपत्ति का सदस्यों में पूर्णरुपेण बंटवारा नहीं किया जाता है तबतक एचयूएफ का अस्तित्व बना रहता है।

इस आर्टिकल के लेखक टैक्स और निवेश एक्सपर्ट बलवंत जैन हैं। 

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